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भारत के 14 बाघ अभयारण्यों के बाघों को मिलेगा बेहतर संरक्षण!

AssuredTiger Standards
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PIB Delhi: भारत के 14 बाघ अभयारण्यों को बाघों के बेहतर संरक्षण (Tiger Conservation) के लिए ‘वैश्विक CA|TS’ (Global Conservation Assured|Tiger Standards) मान्यता मिल चुकी है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि बाघों का संरक्षण वनों के संरक्षण का प्रतीक है। यह कदम देश की वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। 

पर्यावरण मंत्री ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि  ‘तेंदुओं, सह-परभक्षियों और शाकाहारी प्राणियों की स्थिति-2018’  (‘Status of Leopards, Co-predators and Megaherbivores-2018’) के तथ्य का प्रमाण है कि बाघों के संरक्षण से पूरे इकोसिस्टम का संरक्षण होता है। वर्ष 2018 में बाघों की संख्या के अखिल भारतीय आकलन के दौरान, देश के बाघों वाले राज्यों में वनाच्छादित प्राकृतिक वासों के भीतर तेंदुओं की आबादी का भी अनुमान लगाया गया था।

वर्ष 2018 में भारत के बाघों के विचरण वाले इलाकों में तेंदुओं की कुल आबादी 12,852 (SE range 12,172 – 13,535) थी। वर्ष 2014 की तुलना करें तो 2018 में वृद्धि हुई है। जोकि देश के बाघों वाले 18 राज्यों के वनाच्छादित प्राकृतिक वासों में 7,910 (SE range 6,566-9,181) थी।

14 बाघ अभयारण्यों को मिली मान्यता:- (Global Conservation Assured)

भारत के उन 14 बाघ अभयारण्यों पर विशेष महत्व दिया गया है, जो कि ग्लोबल कंजर्वेशन एश्योर्ड (Global Conservation Assured)| जिन्हें टाइगर स्टैंडर्ड्स (सीए|टीएस) की मान्यता मिली है। 14 बाघ अभयारण्यों को मान्यता दी गई है- जिनमें असम के मानस, काजीरंगा और ओरंग, मध्य प्रदेश के सतपुड़ा, कान्हा और पन्ना, महाराष्ट्र के पेंच, बिहार में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, उत्तर प्रदेश के दुधवा, पश्चिम बंगाल के सुंदरबन, केरल में परम्बिकुलम, कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व और तमिलनाडु के मुदुमलई और अनामलई टाइगर रिजर्व शामिल हैं।   

Global Conservation Assured|Tiger Standards को टाइगर रेंज कंट्रीज (TRC) के वैश्विक गठबंधन द्वारा मान्यता को स्वीकारा गया है। बाघों एवं संरक्षित क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा विकसित किया गया है।

देखें यह वीडियो: PET TREND OF TIGER 

Tiger Conservation:-

आधिकारिक तौर पर 2013 में लॉन्च किया गया यह मानक लक्षित प्रजातियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करता है और प्रासंगिक संरक्षित क्षेत्रों में इन मानकों के मूल्यांकन को प्रोत्साहित करता है।

CA|TS

CA|TS

Conservation Assured|Tiger Standards (CA|TS) क्या है? 

CA|TS विभिन्न मानदंडों का एक सेट है, जो बाघ से जुड़े स्थानों को निरीक्षण का मौका देता है कि क्या उनके प्रबंधन से बाघों का सफल संरक्षण संभव होगा। पर्यावरण राज्यमंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि प्रकृति और जीवन के सभी रूपों के साथ सामंजस्य बिठाने की सदियों पुरानी परंपरा पर जोर दिया जाए। क्यूंकि एक शीर्ष शिकारी के रूप में बाघ स्वस्थ इकोसिस्टम को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बाघों एवं उनके प्राकृतिक आवासों को बचाने के लिए सभी को एक साथ मिलकर प्रयास करना जरूरी है। 

International Tigar Day

पर्यावरण सचिव श्री आर.पी. गुप्ता और एनटीसीए के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा वैश्विक बाघ दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की त्रैमासिक पत्रिका ‘स्ट्रिप्स’ के एक विशेष संस्करण का विमोचन किया। 

यहाँ पढ़ें: कौन खतरे में डाल रहा है बाघ की संपूर्ण प्रजाति को?

National Tiger Conservation Authority (NTCA):-

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने बाघों और जंगलों की सुरक्षा में लगे अग्रिम पंक्ति के कुछ वन्यकर्मियों के उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए उन्हें ‘बाघरक्षक’ के रूप में सम्मानित किया गया।

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा, “वनों से जुड़े हमारे बल घातक कोविड -19 महामारी के दौरान भी जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते रहे। अग्रिम पंक्ति के सभी वन कर्मचारियों को हमारी प्राकृतिक विरासत की रक्षा में जुटे रहने की उनकी भावना के लिए बधाई दी”। 

वन्यजीव संरक्षण को ‘आवश्यक सेवाओं’ के रूप में वर्गीकृत करने में बाघरक्षक सक्रिय:- भारत सरकार ने लॉकडाउन के दौरान वन और वन्यजीव संरक्षण को ‘आवश्यक सेवाओं’ के रूप में वर्गीकृत करने के लिए एक सक्रिय कदम उठाया है। देश के वनों से जुड़े बाघ रक्षकों ने कोविड -19 महामारी के दौरान भी जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा में दिन-रात मेहनत करते रहे। बाघरक्षक महामारी के दौरान भी सक्रिय रूप से सेवा प्रदान कर रहे हैं। बाघों की रक्षा के लिए तैनात हैं।  

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