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Homeभक्तिजब शीतला माता के आशीर्वाद से जिंदा हो गया मरा हुआ बच्चा!, पढ़ें शीतला सातम का महत्व

जब शीतला माता के आशीर्वाद से जिंदा हो गया मरा हुआ बच्चा!, पढ़ें शीतला सातम का महत्व

Shitala Shatam
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गुजरात में शीतला माता  की कथा और पूजा का विशेष महत्व है. गुजरात में श्रावण महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ये त्यौहार मनाते हैं. कहा जाता है कि शीतला सातम (Shitala Satam) के दिन व्रत करने वाला व्यक्ति अलग से पूजा करता है जिससे शीतला माता प्रसन्न होती है.

यह त्योहार क्या है?

एक किंवदंती के अनुसार, जेठानी और देवरानी नाम की दो महिलाएं अपनी सास के साथ रहतीं थीं. इन दोनों का एक-एक बेटा भी था.  इनमें जेठानी ईर्ष्यालु थी जबकि डेरानी का स्वभाव काफी शांत और सरल था. एक बार सास ने सबसे छोटी बहू देवरानी को खाना पकाने को कहा तो वह देर रात तक खाना बनाती रही. इसी दौरान पालने में पड़ा उसका बच्चा रोने लगा. बच्चे के रोने की आवाज सुनते ही मां बच्चे के पास चली गई और थक कर सो गई, इस बीच चूल्हा बंद करना भूल गई. 

शीतला माता ने दिया था श्राप

आधी रात को शीतला माता वहां पहुंचीं तो देखा कि चूल्हा जल रहा था और चूल्हे पर बैठने लगी तो त्वचा जल गई, तब शीतला माता ने श्राप दिया कि मेरा शरीर जल रहा है तो उसका पेट जलेगा (जिसका मतलब ये था कि उसका बच्चा मर जाएगा).  जब देवरानी ने सुबह उठकर देखा कि बगल में पड़ा उसके बच्चे की मौत हो चुकी थी, उसका शरीर जल गया था. जिसे देखकर सब रोने लगे. उसके बाद देवरानी अपनी सास को पूरी बात बताती है तो सास कहती है शीतला माता की प्रार्थना करो सब ठीक हो जाएगा.

Shitala Shatam

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रास्ते में दो तालाब और दो बैल मिले

मरे हुए बच्चे को लेकर देवरानी घर से निकल गई तो उसे रास्ते में दो तालाब देखा, जिसके बारे में कहा जाता था कि जो कोई भी इस तालाब का पानी पीएगा मर जाएगा, तब तालाब ने पूछा कि तुम कहां जा रही हो, उसने कहा कि मैं शीतला माता के पास जा रही हूं, उसके बाद तालाब ने कहा कि हमारे शाप के निवारण का भी उपाय पूछना. उसके बाद वह आगे बढ़ी तो दो बैल मिले, जो लड़ रहे होते हैं. बैल ने पूछा कि कहां जा रहे हो, तो उसने कहा कि मैं शीतला माता के पास जा रही हूं तो उसने कहा कि हम अपने पापों की क्षमा मांगते हैं, ये पूछना कि हमने कौन सा पाप किया है, हम लड़ते ही रहते हैं.

बूढ़ी महिला के रूप में शीतला माता ने दिए दर्शन

उसके बाद एक बूढ़ी महिला मिली जो बालों से जूं निकाल रही थी, उसने कहा कि जूं निकाल दो. तब देवरानी ने अपने मरे हुए बच्चे को महिला के गोद में दे दिया और जूं निकालने लगी, तब महिला ने आशीर्वाद दिया कि मेरा सिर जितना ठंडा होगा उतना तुम्हारा पेट ठंडा हो गया. जिसके बाद अचानक से चमत्कार हुआ और बूढ़ी महिला के गोद में बैठा बच्चा जिंदा हो गया. तब महिला समझ गई कि यही शीतला माता है और उनका आशीर्वाद लिया.

तालाब और बैल हुए श्राप मुक्त

उसके बाद महिला ने तालाब के श्राप का कारण पूछा तो शीतला माता ने बताया कि पूर्व जन्म में दोनों तालाब सब्जी या छाछ किसी को नहीं देते थे अगर देते भी थे तो पानी डालकर देते थे, इसलिए उस वक्त कोई खा नहीं पाता था. अगर तुम उस तालाब का पानी पी लोगी तो वह श्राप से मुक्त हो जाएंगे. उसके बाद देवरानी ने बैलों के बारे में पूछा तो शीतला माता ने बताया कि जन्म के समय वह देवरानी और जेठानी थे जो दूसरे लोगों को आटा नहीं पीसने देते थे. तो दोनों इस जन्म में बैल बने हैं और गले में घंटी भी है, अगर घंटी निकाल दोगे तो पाप दूर हो जाएंगे. इसके बाद देवरानी ने वैसा ही किया, दोनों श्राप से मुक्त हो गए.

Shitala Shatam

जेठानी ने भी ऐसा करने का सोचा

फिर जब सास को यह सारी बाते पता चलती है तो उससे जेठानी जलने लगती है. उसने सोचा कि मैं भी ऐसा करूंगी. अगले साल उसने ऐसा किया तो उसका भी बच्चा मरा हुआ मिला, उसके बाद वह अपने बच्चे को लेकर निकल गई, फिर उसे रास्ते में दो तालाब और बैल मिले लेकिन उसने उनके काम करने से इनकार कर दिया फिर रास्ते में बूढ़ी मां के रूप में उसे शीतला माता मिलीं जिनकी बात मानने से इनकार कर दिया, थक-हारकर वह घर लौटी लेकिन शीतला माता उसे नहीं मिलीं. आखिर में उसने कहा कि जैसा देवरानी को फल दिया वैसे ही सबको दें. 

क्या है अनुष्ठान है?

शीतला सातम (Shitala Satam) के पूजा अनुष्ठान में महिलाएं श्रावण वाद के सातवें दिन यह व्रत करती हैं. व्रत करने वाली महिला सुबह जल्दी उठ जाती है, ठंडे पानी से नहाती है और दिन भर बनी हुई ठंडा खाना खाती है. उस दिन चूल्हा भी नहीं जलता. घी का दीपक जलाकर शीतला माता (Shitala Satam) की कथा सुनाई जाती है. एक लोककथा के अनुसार यह सब करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. 

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