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Tokyo Paralympics 2020: पावरलिफ्टर सकीना खातून ने मेडल नहीं जीता, लेकिन रिकॉर्ड बना दिया

Sakina Khatun
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टोक्यो पैरालंपिक(Tokyo Paralympic 2020) खेलों के तीसरे दिन सकीना खातून (Sakina Khatun) ने पावरलिफ्टिंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया. वह 50 किलोग्राम के इवेंट में पांचवें स्थान पर आने के बाद मेडल जीतने से चूक गईं. सकीना  पैरालंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला पावरलिफ्टर हैं. इससे पहले केवल पुरुषों ने ही इस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व किया था.

जयदीप भी नहीं जीत पाए मेडल 

उन्होंने दुबई में पैरा पावरलिफ्टिंग विश्व कप में 80 किग्रा भार उठाकर 45 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर टोक्यो पैरालिंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई किया था. इसके अलावा कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने वाली वो एकमात्र भारतीय महिला पैरा-एथलीट हैं. सकीना के अलावा 65 किलोग्राम में पावरलिफ्टर जयदीप देसवाल भी देश के लिए मेडल लाने उतरे लेकिन वो भी मेडल से चूक गए. 

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पांचवें स्थान पर रहीं सकीना खातून

पावरलिफ्टिंग खेलों में हर खिलाड़ी को तीन मौके दिए जाते हैं और उसमें से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन गिना जाता है. सकीना खातून ने पहले अटेंप्ट में 90 किलोग्राम और अगले दो अटेंप्ट में 93 किलो ग्राम का वजन उठाया. 93 किलोग्राम के साथ वह पांचवें स्थान पर रहीं. गोल्ड मेडल चीन की एचयू डी ने जीता, जिन्होंने 120 किलोग्राम वजन उठाया. दूसरी स्थान पर इजिप्ट की आर अहमद रहीं जिन्होने 120 किलोग्राम उठाकर पैरालंपिक रिकॉर्ड कायम किया लेकिन एक फेल्ड अटेंप्ट के कारण वह सिल्वर मेडल ही अपने नाम कर पाईं.

पोलियो को मात देकर पैरालंपिक तक का तय किया सफर

सकीना खातून का जन्म 20 जून 1989 को बेंगलुरु में हुआ. छोटी उम्र में ही पोलियो का शिकार हो जाने के कारण उनके भविष्य को लेकर उनका परिवार चिंतित रहता था, मगर खातून के खेलों के शौक ने उन्हें कुछ असाधारण करने के लिए प्रेरित किया. डॉक्टर्स की सलाह पर उन्होंने सर्जरी कराई और 2010 में 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद पावरलिफ्टिंग में ट्रेनिंग शुरू कर दिया. खातून ने 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में 88.2 किग्रा भार उठाकर 61 किग्रा वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता और पहली बार सुर्खियों में आई. 2018 में, इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में खातून ने दूसरा स्थान हासिल किया था.

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