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नेपाल से महाराष्ट्र के राज्य पक्षी को खतरा!

Treron phoenicoptera
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सुंदर पीले पैर वाले हरे कबूतर को हरियाल (Treron phoenicoptera) कहा जाता है. हरियल महाराष्ट्र का राज्य पक्षी हैं. पीले पैर वाले कबूतर (Treron phoenicoptera) जिसे हरियल कहा जाता है. भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले हरे पैरवाले कबूतर (Treron phoenicoptera) की एक सामान्य प्रजाति है. यह प्रजाति फलाहार करती है, जिसमें फिकस (Ficus) की कई प्रजातियां शामिल हैं. ये झुंड में चारा खाते हैं. सुबह के समय वे अक्सर घने वन क्षेत्रों में लंबे हरेभरे पेड़ों के शीर्ष पर धूप सेंकते देखे जाते हैं. ये विशेष रूप से पेड़ की शाखाओं पर जोड़े में बैठे पाए जाते हैं.ये अर्ध सदाबहार पर्णपाती वन, वनाच्छादित जंगल और माध्यमिक वनों में 800 मीटर तक की दूरी पर रहना पसंद करते हैं.

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(Treron phoenicoptera) कबूतर परिवार कोलंबिया (Columbia) में पक्षियों का एक समूह है. इसके सदस्यों को आमतौर पर हरे कबूतर (Treron phoenicoptera) कहा जाता है. यह जीनस(Genus) एशिया (Asia) और अफ्रीका (Africa) में फैले हुए हैं. इस जीनस में 29 प्रजातियां शामिल हैं, जो उनके हरे रंग के लिए उल्लेखनीय हैं, इनका यह रंग इनके आहार में कैरोटीनॉयड वर्णक (Carotenoid pigment) से आता है.हरे कबूतरों (Treron phoenicoptera) का आहार विभिन्न फल, मेवे और बीज होते हैं. इस जीन के सदस्यों को लंबी पूंछ, मध्यम लंबाई वाली पूंछ और पच्चर के आकार की पूंछ के आधार पर बांटा जा सकता है. वयस्क पीले पैर वाले हरे कबूतर का आकार 29 से 33 सेमी के बीच होता है. पूंछ की लंबाई 8 से 10 सेमी के बीच होती है.  वयस्क का वजन 225 से 260 ग्राम के बीच होता है. उनके पास 17 से 19 सेमी के पंख होते हैं.हरे कबूतरों की अधिकांश प्रजातियां यौन द्विरूपता को प्रदर्शित करती हैं, जहां नर और मादा को अलग-अलग रंगों से आसानी से पहचाना जा सकता है.इनके प्रजनन का सही समय तो किसी को ज्ञात नहीं है किंतु जनवरी के महीने में यह अंडे देते हैं. यह 15-17 दिनों के लिए अंडे सेते हैं. हैचिंग (Hatching) के बाद, चूजों को 

Treron phoenicoptera

Image-WIKIPEDIA

नर और मादा दोनों के द्वारा खिलाया जाता है.इनका शोर, तेज, मजबूत और प्रत्यक्ष होता है, और इनके कॉल (Call) की लगभग दस सुंदर, मधुर, संगीतमय ध्‍वनि की एक श्रृंखला होती है. जो आमतौर पर एक इलाके में उनकी उपस्थिति का संकेत देती हैं. हरियल शाकाहारी होते हैं. यह कबूतर आम कबूतरों के समान ही टहनियों और छोटी शाखाओं से अपना घोंसला बनाते हैं. यह घोंसले वृक्षों पर लगभग 12-20 फ़ीट ऊंचाई पर होते हैं, यह रंग से छलावरण भी कर सकते हैं. राजस्थान में नीम के पेड़ पर इनका एक घोंसला देखा गया जिसका रंग बिल्कुल उनके शरीर के रंग से मेल खाता है.हरे कबूतर आमतौर पर समूहों में रहते हैं, लेकिन संभोग जोड़े में पाए जा सकते हैं. ये पक्षी मनुष्यों से दूर जंगली वातावरण में रहना पसंद करते हैं. लेकिन आजकल, इन्‍हें शहर और कस्बों के बाहरी इलाकों में भी देखा जा रहा है.वे आमतौर पर सड़क के किनारे के पेड़ों विशेषकर बरगद और पीपल के पेड़ों में पाए जाते हैं. ये सामाजिक पक्षी हैं.

Treron phoenicoptera

Image- commons.wikimedia.org

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