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धन, ऐश्वर्य, भोग और मोक्ष की अधिष्ठात्री देवी: ‘त्रिपुर सुंदरी’

Tripura Sundari
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या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

अर्थात: जो देवी  सभी प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उनको नमस्कार, उनको नमस्कार, उनको बारम्बार नमस्कार है।

Tripura Sundari (त्रिपुर सुंदरी): बांसवाड़ा जिले से करीब 20 किलोमीटर दूर तलवाड़ा गांव में अरावली पर्वतमालाओं के बीच माता त्रिपुर सुंदरी का भव्य मंदिर स्थापित है। नवरात्रि के दिनों में  माता त्रिपुर सुंदरी के दर्शन का विशेष महत्व है। मंदिर में सिंंहवाहिनी मां भगवती त्रिपुर सुंंदरी की मूर्ति अष्टदश यानि की (अठारह) भुजाओं वाली है। त्रिपुर सुंदरी माता की पांच फीट ऊंंची मूर्ति स्थापित है। स्थापित मूर्ति में माता दुर्गा के नौ रूपों छवि अंकित है। 

देखें यह वीडियो: त्रिपुर सुंदरी

माँ का सौन्दर्य, शृंगार और आभा दर्शनार्थियों को आकर्षित करती है:- 

त्रिपुर सुंदरी माता का सौन्दर्य, शृंगार, सुंदर प्रतिमा भक्तों को आकर्षित करती है। श्रद्धालु मन से माता की श्रध्दा भक्ति करते है। माता के चौखट पर घंटों मूर्ति को निहारते रहते हैं। मंदिर कई वर्ष पुराना है। लेकिन मौजूद शिलालेखों से पता चलता है कि मंदिर का निर्माण संवत 1540 के दौरान किया गया था। कहा जाता है कि मंदिर के निकट कई वर्षों पहले गढ़पोली नामक महासागर था। वहां पर सीतापुरी, शिवपुरी और विष्णुपुरी तीन दुर्ग मौजूद थे। अब यही स्थान माता त्रिपुर सुंदरी (Tripura Sundari Banswara) के नाम से जाना जाता है।  

पौराणिक गाथा के अनुसार, (Tripura Sundari Mandir) 

कहा जाता है कि माता त्रिपुर सुंदरी ने शुभ और निशुंभ नाम के राक्षसों का वध किया था। एक कहानी कुछ ऐसी है कि मालव नरेश जगदेश परमार ने मां के श्री चरणों में अपना शीश काटकर अर्पित कर दिया था। उसी क्षण राजा सिद्धराज मां से प्रार्थना की और मां ने पुत्र नरेश जगदेव को पुनर्जीवित कर दिया था। गुजरात, मालवा और मारवाड़ के शासक माँ के चरणों में शीश नवाकर ही युद्ध के लिए प्रयाण करते थे। गुजरात के सोलंकी राजा सिद्धराज जयसिंह की ईष्ट देवी थी मां सुंदरी।  

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर

त्रिपुर सुंदरी माता को तीन रूपों में चित्रित किया गया है:- 

देवी त्रिपुर सुंदरी को तीन रूपों में चित्रित किया गया है: त्रिपुरा बाला, त्रिपुर सुंदरी (Tripura Sundari) और त्रिपुर भैरवी। त्रिपुर बाला एक युवा कुंवारी देवी का प्रतिनिधित्व है जबकि त्रिपुर सुंदरी तीनों लोकों की एक अद्भुत शाश्वत सुंदरता का प्रतीक है। त्रिपुर भैरव का तीसरा रूप देवी ललिता की भयानक शक्ति है। जबकि उनके अन्य दो रूप श्री चक्र की पूजा में निहित श्री विद्या परंपरा के केंद्र में हैं, त्रिपुरा के अलग-अलग नाम हैं।  

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माँ त्रिपुर सुंदरी के दर्शन के लिए गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, और तमिलनाडु से श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। माता का मंदिर अधिक सिद्ध है। कई राजनेता अपनी कार्यप्रणाली को शुरू करने से पहले माता की चौखट में नतमस्तक करने अवश्य आते हैं। मां का मंदिर देश-विदेश में अधिक प्रसिद्ध है।  

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