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Homeन्यूजCAA और NRC वापस करने की मांग करने वालों को केन्द्रीय मंत्री ने बताया गलतफहमी का शिकार

CAA और NRC वापस करने की मांग करने वालों को केन्द्रीय मंत्री ने बताया गलतफहमी का शिकार

Kaushal Kishore
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कृषि कानूनों की वापसी(Farm Laws Repeal) के ऐलान के बाद से लोग सीएए और एनआरसी की वापसी(Repeal Of CAA-NRC)की भी मांग करने लगे हैं. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को दोबारा से बहाल करने की भी मांग उठने लगी है. सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या कृषि कानूनों की तरह अचानक सरकार सीएए और एनआरसी को वापस लेने का ऐलान करेगी.

सोशल मीडिया पऱ उठ रही ऐसी मांगों को सवालों का केन्द्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर(Kaushal Kishore) ने जवाब दिया है. उन्होंने कहा है कि कृषि कानूनों के वापस लेने के ऐलान वाले फैसले का विपक्ष को स्वागत करना चाहिए. विपक्ष के पास अब मुद्दा ही नहीं बचा है. इसलिए वह सोच रहा है कि कृषि कानून वापस हो गए तो सीएए और एनआरसी को भी वापस ले लिया जाएगा.

ऐसी मांग करने वाले गलतफहमी के शिकार- केन्द्रीय राज्यमंत्री

केन्द्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि सीएए-एनआरसी(Repeal Of CAA-NRC) वापस करने की मांग करने वाले गलतफहमी के शिकार हैं. बता दें कि कौशल किशोर शहरी आवास और विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री हैं. दरअसल कृषि कानूनों की वापसी के बाद से कई मुस्लिम नेताओं के ऐसे बयान सामने आए हैं, जिसमें कहा गया है कि सरकार को नागरिकता संशोधन कानून वापस लेना होगा.

क्या है नागरिकता संशोधन कानून(CAA)

बता दें कि साल 2019 में मोदी सरकार ने नागरिकता कानून में संशोधन किया है, जिसके मुताबिक अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, बौद्ध, जैन और क्रिश्चन समुदाय के लोगों के लिए नागरिकता की प्रक्रिया को पहले की तुलना में आसान किया गया है. इसमें मुस्लिम समुदाय को शामिल नहीं किया गया है, जिसकी वजह से विरोध हो रहा है. पहले जहां नागरिकता के लिए 11 साल देश में रहना जरूरी था तो वहीं अब 6 साल रहना जरूरी है. इसके खिलाफ कई राज्यों में प्रस्ताव भी पास हो चुका है.

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क्या है राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर(NRC)

वहीं एनआरसी की बात करें तो अवैध लोगों की पहचान करने के लिए सरकार पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लागू करना चाहती है. फिलहाल ये असम में लागू है. इसके मुताबिक लोगों को अपनी नागरिकता के लिए दस्तावेज दिखाना होगा. जिसका पूरे देश भर में विरोध हो रहा है. इसके तहत नागरिकता साबित करने के लिए ये जरूरी है कि पूर्वज 1971 से पहले भारत में आ चुके थे. अब इस बात को लेकर भी विरोध हो रहा है.

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