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Homeभक्तिजाति गई नहीं बल्कि बरकरार है! बिहार के इस गांव में यादवों के लिए अलग और दलितों के लिए अलग है मंदिर

जाति गई नहीं बल्कि बरकरार है! बिहार के इस गांव में यादवों के लिए अलग और दलितों के लिए अलग है मंदिर

unique village
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Unique Village: एक कहावत है कि जाति(Caste) है कि जाती नहीं हो सकता है आपने सुना हो या नहीं सुना हो तो इसे ऐसे समझिए कि जाति मिटती नहीं और ये बातें बिहार में आपको बिल्कुल प्रत्यक्ष तौर पर दिखती हैं. भले ही भक्ति का मार्ग मृत्युलोक से परे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता हो लेकिन बिहार का एक गांव(Unique Villages In Bihar) ऐसा भी है जहां भक्ति करने के लिए मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु जाति के हिसाब से मंदिर में प्रवेश करते हैं. मतलब अगर आप फलां जाति के हैं तो आपके लिए फलां मंदिर और फलां जाति के हैं तो फलां मंदिर हैं.

temple bihar

Image Courtesy: Googl.com

जाति है कि अभी तक नहीं जाती  

अब आप कहेंगे कि संविधान(Constitution Of India) के हिसाब से तो जाति व्यवस्था(Caste System) कब की खत्म हो गई और खत्म करने की कोशिश लगातार जारी है. लेकिन सच यही है जो आपने ऊपर पढ़ा है. ब्राह्मणों के लिए अलग मंदिर, भूमिहारों के लिए अलग मंदिर और दलितों के लिए अलग(Separate Temple For Every Caste) मंदिर है. बिहार के नवादा(Nawada) जिले में स्थित सीतामढ़ी(Sitamarhi Village) गांव में वर्षों से ये परंपरा चली आ रही है.

temple

Image Courtesy: Googl.com

जिस जाति का मंदिर, उसी जाति के पुजारी

ये उस जगह की हकीकत है, जो लव-कुश की जन्मस्थली के रूप में विख्यात है. यहां के मंदिरों की खासियत ये है कि जिस जाति का मंदिर होगा उसी जाति का पुजारी भी होगा. स्थानीय लोग इसे सामाजिक सद्भावना की मिसाल कहते हैं, बताते हैं कि प्राचीन काल में एक बार मंदिर को लेकर विवाद हुआ था तभी से ये समाधान निकला और उसके बाद से कभी कोई विवाद नहीं हुआ.

temple bihar

Image Courtesy: Googl.com

ये भी पढ़ें: दुनिया का पहला मंदिर जहां आधी रात को मूर्तियां करती हैं एक दूसरे से बात, रहस्य जानकर रह जाएंगे हैरान

हर जाति के लिए अलग-अलग मंदिर

लेकिन 21वीं सदी में भी जातिव्यवस्था का बरकरार होना हमारे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है. रविदास समाज(दलित) के लिए कबीर मठ, राजवंशी समाज के लिए ठाकुरबाड़ी, चंद्रवंशी समाज के लिए जरासंध मंदिर, चौहान समाज के लिए चौहान ठाकुरबाड़ी, कोयरी समाज के बाल्मीकि मंदिर, चौधरी(पासी जाति) के लिए शिव मंदिर, सोनार जाति के लिए नरहरि विश्वकर्मा मंदिर, मुसहर समाज के लिए शबरी मंदिर और यादवों के लिए राधाकृष्ण मंदिर मौजूद हैं.

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