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HomeकहानियांUttar Pradesh के दो IPS अफसरों की कहानी जिन्हें मिलने जा रहा है अमेरिका का प्रतिष्ठित अवॉर्ड

Uttar Pradesh के दो IPS अफसरों की कहानी जिन्हें मिलने जा रहा है अमेरिका का प्रतिष्ठित अवॉर्ड

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अपराधियों पर नकेल कसने की कवायद लगातार जारी है. सूबे में अपराधियों के बढ़ते हौसले पर यूपी पुलिस लगातार अपनी लाठी चला रही है. वहीं अपराधियों पर यूपी पुलिस की नकेल कसने की कोशिशों और कम्युनिटी पुलिसिंग को लेकर उत्तर प्रदेश के 2 आईपीएस अफसरों के नाम एक बड़ी उपलब्धि होने जा रही है. दरअसल यूपी के 2 आईपीएस अफसरों को अमेरिका का प्रतिष्ठित सम्मान आईएसीपी अवॉर्ड मिलने जा रहा है.

ये है संतोष सिंह की कहानी

40 साल की उम्र में इन दोनों अफसरों ने कमाल कर दिखाया है. International Association of Chiefs of Police यानी IACP अवॉर्ड shaping the future of policing profession के मकसद से इस अवॉर्ड के लिए दुनिया के 165 देशों में से 40 साल से कम उम्र के 40 अफसरों को चुना गया है. इन्हीं अफसरों में भारत के भी 2 अफसर शामिल हुए हैं और दोनों ही यूपी से हैं. आज हम आपको हमारे इस खास सेग्मेंट कहानियां में इन्हीं दो अफसरों की कहानी बताएंगे कैसे उन्होंने ये मुकाम हासिल किया.

ये कहानी है उत्तर प्रदेश के चंदौली में बतौर एसपी तैनात आईपीस अमित कुमार और छत्तीसगढ़ कैडर के संतोष कुमार सिंह की जो कि यूपी के ही रहने वाले हैं. आईपीएस संतोष कुमार सिंह इस समय इनकी पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के कोरिया जिल में हैं. जहां ये बतौर पुलिस कप्तान तैनात है. संतोष सिंह गाजीपुर के देवकली गांव के रहने वाले हैं और इनके पिता पेशे से एक पत्रकार हैं. संतोष सिंह की शुरुआती पढ़ाई गाजीपुर के नवोदय विद्यालय से पूरी हुई जिसके बाद इन्होंने राजनीतिक शास्त्र में ग्रेजुएशन की डिग्री बीएचयू से ली और इसमें उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया.

इसके बाद संतोष कुमार सिंह ने जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर एमफिल की और वो फिलहाल दुर्ग यूनिवर्सिटी से संयुक्त राष्ट्र के शांति प्रयासों पर पीएचडी कर रहे हैं. संतोष कुमार ने 10 साल के पुलिस करियर में 8 साल तक अपराध पर लगाम लगाने और कम्युनिटी पुलिसिंग पर बेमिसाल काम किया. छत्तीसगढ़ में नक्सिलयों पर नकेल कसने में भी संतोष सिंह का कोई जवाब नहीं. 2014 से 2016 के बीच महज दो साल में उन्होंने एक हजार नक्सलियों का सरेंडर करवाया. सुकमा में उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ एसपी नक्सल ऑपरेशन चलाया इसमें 500 नक्सली गिरफ्तार हुए और 88 नक्सली मारे गए.

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अमित कुमार थे इंजीनियर  

वहीं आईएसीपी अवॉर्ड से नवाजे जाने वाले दूसरे आईपीएस ऑफिसर का नाम है अमित कुमार. अमित कुमार 2015 बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं. चंदौली में एसपी के पद पर तैनात अमित कुमार मूल रुप से दिल्ली के रहने वाले हैं. अमित कुमार के पिता की बात करें तो वो सीआऱपीएफ में अस्टिटेंट कमांडेंट के पद से रिटायर हैं. अमित कुमार ने अलग-अलग फील्ड्स में पढाई की. पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने साथ ही उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया.

इसके बाद उन्होंने अमेरिका के लॉस एंजिलिस में एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी में काम किया. लेकिन आईपीएस बनने के लिए उन्होंने अमेरिका की जॉब छोड़कर खाकी की वर्दी पहन देश की सेवा करना शुरु कर दिया.

अमित कुमार लखनऊ के गैंग से 15 करोड़ की 112 गाडियों की बरामदगी के ऑपरेशन को लीड कर रहे थे. इसे देश का सबसे बडे ऑपरेशन माना गया था. अमित कुमार के छोटे भाई सेना में मेजर हैं. अब अमित कुमार और संतोष सिंह अमेरिका के इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड को हासिल कर देश को एक नया गौरव दिलाने जा रहे हैं.

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