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HomeकहानियांUttarakhand Foundation Day 2021: 21 साल में सिर्फ एक CM ही पूरा कर पाए कार्यकाल, कुछ ऐसा है उत्तराखंड का राजनैतिक इतिहास  

Uttarakhand Foundation Day 2021: 21 साल में सिर्फ एक CM ही पूरा कर पाए कार्यकाल, कुछ ऐसा है उत्तराखंड का राजनैतिक इतिहास  

Uttarakhand Foundation Day 2021
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9 नवंबर 2000 की तारीख एक ऐसी तारीख है जिस दिन देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से अलग होकर एक राज्य उत्तरांचल का उदय हुआ. साल 2006 तक इसका नाम उत्तरांचल रहा, लेकिन उसके बाद इसे उत्तराखंड (Uttarakhand) के नाम से जाना गया.

21 साल में बने 10 मुख्यमंत्री

उत्तराखंड के गठन (Uttarakhand Foundation Day 2021) के पीछे स्थानीय लोगों की मांग बड़ी वजह रही, लेकिन क्या राज्य गठन के बाद लोगों के सपना पूरा हो पाया, क्या लोगों ने जिस उद्देश्य से इस राज्य गठन की मांग की थी वह पूरा हुआ, ये आज भी एक बड़ा सवाल है. यूं तो 21 सालों में सूबे (Uttarakhand Foundation Day 2021) ने विकास के कई पड़ाव को पार किया लेकिन फिर भी विकास की गति धीमी रही. प्रदेश के विकास में बाधा की एक सबसे बड़ी वजह राजनीतिक अस्थिरता भी रही. इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 21 सालों के इतिहास में सिर्फ एक मुख्यमंत्री (CM) अपना कार्यकाल पूरा कर पाए.

Pushkar Singh Dhami

Image Courtesy: Google.com

पुष्कर सिंह धामी हैं उत्तराखंड के मौजूदा सीएम

आम तौर पर पांच सालों में विधानसभा के चुनाव होते हैं और नए मुख्यमंत्री चुने जाते हैं, लेकिन उत्तराखंड में ऐसा नहीं हुआ. अब तक प्रदेश में 10 मुख्यमंत्री बन चुके हैं. इसी साल जुलाई के महीने में पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है. किसी एक साल में अगर मुख्यमंत्री बदलने का रिकॉर्ड देखें तो वह साल 2021 ही है.

Trivendra Singh Rawat

Image Courtesy: Google.com

त्रिवेन्द्र रावत, तीरथ रावत और अब पुष्कर सिंह धामी

सबसे पहले 10 मार्च 2021 को त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, उसके बाद उसी दिन तीरथ सिंह रावत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली लेकिन छह महीने के अंदर विधानसभा की सदस्यता नहीं लेने की वजह से 4 जुलाई 2021 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और फिर 4 जुलाई 2021 को पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. मतलब साल 2021 में ही दो नए मुख्यमंत्री बन गए.

शुरुआती दो साल में बने दो मुख्यमंत्री

हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ बल्कि इससे पहले भी उत्तराखंड का राजनैतिक इतिहास (Uttarakhand Political History) कुछ ऐसा ही रहा है. 9 नवंबर 2000 को जब उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ तो नित्यानंद स्वामी ने राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन एक साल से भी कम समय तक ये मुख्यमंत्री रहे, उनके बाद भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री बनाया गया जो 1 मार्च 2002 तक मुख्यमंत्री रहे.

ND Tiwari

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5 साल पूरा करने वाले एनडी तिवारी सूबे के इकलौते सीएम

साल 2002 में राज्य गठन के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस की जीत हुई और एनडी तिवारी (ND Tiwari) ने मुख्यमंत्री पद के रूप में शपथ ली. नारायण दत्त तिवारी इकलौते ऐसे सीएम हुए जिन्होंने प्रदेश में पांच साल का कार्यकाल पूरा किया. 2 मार्च 2002 से लेकर 7 मार्च 2002 तक एनडी तिवारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे, हालांकि इनके कार्यकाल के दौरान कई विवाद भी हुए.

बीसी खंडूरी के बाद निशंक ने संभाली थी कमान

साल 2007 के विधानसभा चुनाव बीजेपी ने बाजी मार ली और भुवन चंद्र खंडुरी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और फिर रमेश पोखरियाल निशंक को मुख्यमंत्री बनाया गया, जिन्होंने 2 साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा किया. मतलब साल 2007 के विधानसभा चुनाव के बाद 2012 तक दो मुख्यमंत्री बने.

Vijay Bahuguna

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विजय बहुगुणा के इस्तीफे के बाद सीएम बने हरीश रावत

उसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की और विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बने, लेकिन पार्टी के अंदर चल रही उठापटक की वजह से बहुगुणा को इस्तीफा देना पड़ा और फिर हरीश रावत सूबे के नए मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने 2 साल 55 दिन का कार्यकाल पूरा किया और एक स्टिंग ऑपरेशन के सामने आने के बाद राजनीतिक बवाल इतना बढ़ गया कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. 27 मार्च 2016 से 21 अप्रैल 2016 तक राज्य में राष्ट्रपति शासन रहा.

दो बार लगा राष्ट्रपति शासन

राष्ट्रपति शासन (President Rule) के विरोध में कांग्रेस नेता सड़कों पर उतर आए. उसके बाद हरीश रावत ने एक दिन के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन उसके बाद फिर से राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. कांग्रेस ने राष्ट्रपति शासन के विरोध में उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां से उसे राहत मिली, जिसके बाद राज्य में दोबारा से हरीश रावत की सरकार बहाल हुई और 11 मई 2016 को हरीश रावत ने फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इसके बाद 17 मार्च 2017 तक हरीश रावत (Harish Rawat) उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे.

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करीब 4 साल का ही कार्यकाल पूरा कर पाए त्रिवेन्द्र सिंह रावत

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की और त्रिवेन्द्र सिंह रावत उत्तराखंड (Uttarakhand Foundation Day 2021) के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 5 साल का कार्यकाल पूरा कर पाते उससे पहले ही 10 मार्च 2021 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. उनके बाद तीरथ सिंह रावत मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने पांच महीने बाद ही इस्तीफा दे दिया और फिलहाल पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के 10वें मुख्यमंत्री हैं.

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