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Homeभक्तिजानें क्यों मनाया जाता है वाघ बारस का त्यौहार, क्या है इसके पीछे की पौराणिक मान्यता

जानें क्यों मनाया जाता है वाघ बारस का त्यौहार, क्या है इसके पीछे की पौराणिक मान्यता

Vagh baras 2021
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दीपों का त्यौहार दिवाली (Diwali) इस बार 4 नवंबर को मनाया जाएगा, देशभर में इस दिन लोग मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करेंगे, उससे पहले देशभर में 2 नवंबर को धनतेरस की धूम रहेगी, जिस दिन लोग खरीददारी करते हैं. उससे पहले 1 नवंबर को द्वादशी तिथि को गुजरात में वाघ वारस (Vagh baras 2021) का त्यौहार मनाया जाएगा, हर साल इस त्यौहार पर मां सरस्वती और गाय की पूजा-अर्चना की जाती है, तो आइए जानते हैं कि आखिर इसके पीछे की पौराणिक मान्यता क्या है.

ये है वाघ बारस की पौराणिक कथा

हिंदी में आपने हो सकता है तत्सम और तद्धव के बारे में पढ़ा हो, अगर नहीं पढ़ा तो एक लाइन में ये समझिए कि जैसे संस्कृत में सूर्य और आम तौर पर सूरज कहते हैं. ये तत्सम और तद्धव शब्द हैं. इसमें सूर्य तत्सम और सूरज तद्धव है. यानि कि सूर्य का ही अप्रभंश सूरज है. अब आप कहेंगे कि इसका इस त्यौहार से क्या लेना-देना. तो इसके नाम के पीछे भी यही कहानी है.

Vagh baras 2021

Image Courtesy: Google.com

वाक बारस है इसका असल नाम

कहते हैं कि शुरुआत में इस त्यौहार का नाम वाक बारस था, लेकिन बाद में इस शब्द का अपभ्रंश होते-होते वाघ बारस (Vagh baras 2021) हो गया. यहां वाक का मतलब वाणी से है और वाणी का मतलब मां सरस्वती से है. इस पूजा के पीछे की मान्यता ये है कि आप ऐसी वाणी बोलें कि किसी को ठेस न पहुंचे. वैसे भी हिंदू संस्कृति में मां लक्ष्मी से पहले मां सरस्वती की पूजा की जाती है, तो इस लिहाज से भी दिवाली के ठीक पहले वाक बारस का त्यौहार मनाया जाता है.

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गुजरात में इस दिन से होती है दिवाली की शुरुआत

गुजरात में इस त्यौहार के दिवाली (Diwali) के त्यौहार का पहला दिन माना जाता है. दूसरे अर्थ में यह त्यौहार द्वादशी तिथि को मनाया जाता है और इसे गोवत्स द्वादशी के नाम से जानते हैं. इसे वासु बरस भी कहते हैं. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा की जाती है. गुजरात में इस दिन लोग चौखट की भी पूजा करते हैं. वहीं आदिवासी लोग अपने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए बाघ की पूजा करते हैं. 

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