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Homeभक्तिVautha Mela: गुजरात का एकमात्र मेला जिसे सात नदियों का संगम स्थल माना जाता है, जानिए वजह!

Vautha Mela: गुजरात का एकमात्र मेला जिसे सात नदियों का संगम स्थल माना जाता है, जानिए वजह!

vautha fair
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वौठा मेला (Vautha Mela)

                  म्हारे तो मेळे जावुं सेहर वौठा जी रो मेळो लाग्यो

भारत मेलों का देश है, प्रत्येक राज्य में प्रसिद्ध मेले एवं उत्सव मनाए जाते हैं, जो कि राज्य की संस्कृति और सभ्यता को दर्शाते हैं साथ ही भारत को एक नई पहचान दिलाते हैं। ऐसा ही एक मेला है वौठा मेला। भारत देश के गुजरात राज्य के खेड़ा जिले के धोणका तहसील के वौठा गाँव में मेले का आयोजन किया जाता है। वौठा मेला यानि “सात नदियों का संगम-स्थल”।  यह साबरमती, वात्रक, हाथीमती, खारी, माझम और शेढ़ी नदियों का संगम स्थान है इसीलिए इसे सप्तस-संगम के नाम से भी जाना जाता है। यह सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है, जिसमें ऊँट, गधे और अन्य जानवरों का अच्छा व्यापार किया जाता है। दिवाली के समय इस मेले का अधिक महत्व माना जाता है। इस मेले में 2 से 5 लाख से ज़्यादा लोग हिस्सा लेते हैं। मेले के लिए लगभग 3 वर्ग मील क्षेत्र का निर्माण किया गया है। 

Vautha mela

Vautha mela, google image 

वौठा मेला का पौराणिक महत्व:-

पौराणिक लोकथा के अनुसार कहा जाता है कि भगवान शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ने  समग्र पृथ्वी की प्रदक्षिणा करते हुए इस स्थान पर भी भ्रमण किया था, इसलिए मेले का आयोजन भगवान कार्तिकेय के सम्मान में वर्षों से किया जाता है। लाखों की संख्या में भक्त कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ आते हैं और नदियों के संगम में स्नान कर धन्यता का अनुभव करते हैं। (Vautha Mela) पवित्र स्नान का समारोह कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित किया जाता है। भक्तों की मान्यता है कि पवित्र तीर्थस्थान पर स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और शरीर शुद्ध होता है।

यहां पढ़ें: जानें कब से शुरू हो रहा है पौष का महीना, भगवान सूर्य की उपासना से होगी पद-प्रतिष्ठा में बढ़ोत्तरी

gujarati garba

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गुजरात का एक मात्र पशु व्यापार मेला

वौठा मेले की महत्वपूर्ण बात यह है कि यह गुजरात का एक मात्र पशु व्यापार मेला है, जिसकी तुलना पुष्कर, अर्थात राजस्थान में प्रसिद्ध ऊँट मेले से  की जाती है। हर साल नवंबर महीने में (हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीना) मेले का आयोजन किया जाता है जो लगातार 5 दिनों तक चलता है। वौठा मेले में गधों के बिक्री की जाती है,  जिसमें हर साल करीब 4,000 गधे लाए जाते हैं। बंजारा जनजाति (समुदाय) के व्यापारियों द्वारा गधों को लाल, गुलाबी, केसरी, आसमानी जैसे विभिन्न रंगों से सजाया जाता है, सजे हुए गधे मेले के आकर्षण का केंद्र होते हैं। मेले में 25 हजार से ज्यादा लोग प्रतिवर्ष मेले में भाग लेते हैं और 2000 तंबुओं का निर्माण करके सभी यहाँ आकर साथ में रहते हैं और वौठा मेले के शानदार प्रदर्शन का आनंद लेते हैं।    

vautha fair

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गांववासी कलाकृतियों और संस्कृति को पेश करते

वौठा मेले में छोटी दुकानों, मनोरंजन के साधन, मदारी, जादूगर, नट, भवाई, सर्कस जैसी मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था की जाती है। सभी गांववासी इस मनोरंजन का हिस्सा बनते हैं और अपने गाँव की कलाकृतियों और संस्कृति को पेश करते हैं। धोणका तहसील की पंचायत द्वारा रात के समय भजनमंडली और अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। 

भव्य वौठा मेले में देश-विदेश से भी लोग घूमने आते हैं। मेले के दौरान ग्रामीणों द्वारा हस्तशिल्प और खाद्य स्टालों को भी प्रस्तुत किया जाता है। आप भी दिवाली के समय गुजरात में घूमने आते हैं तो वौठा मेले का आनंद जरूर लें। 

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