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ब्रेन स्ट्रोक क्या है? कैसे करें प्राथमिक लक्षणों की पहचान!

Brain Stroke
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हमारी सभी कार्य प्रणालियाँ  मस्तिष्क पर आधारित है। यदि हमारा मस्तिष्क कार्यप्रणालियों को मार्गदर्शन देना बंद कर दे तो व्यक्ति कोई भी कार्य करने के लिए सक्षम नहीं रहता है। लेकिन मस्तिष्क/ब्रेन से जुड़ी कई ऐसी बीमारियाँ हैं। जिनका ध्यान रखना, उनके बारे में हमें पता होना आवश्यक है। आइए जानते हैं, ब्रेन स्ट्रोक के बारे में। ब्रेन स्ट्रोक क्या है? स्ट्रोक के लक्षण क्या हैं? क्या इस बीमारी का कोई इलाज है? 

ब्रेन स्ट्रोक क्या है? (What is Brain Stroke)

हमारे शरीर की रक्त नलिकाएं ह्रदय से मस्तिष्क तक रक्त को पहुंचाने का काम करती हैं। जब मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली रक्त नली फट जाती है। रक्त का थक्का जमने लगता है और संचार बाधित होता है और ऑक्सीजन भी नहीं पहुँच पाता। तब स्ट्रोक की परिस्थिति बनती है। जिसे ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) कहते हैं। ऐसी परिस्थिति में मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है। जिस वजह से पूरे शरीर की प्रक्रियाएं रुक जाती हैं। इसे ब्रेन अटैक भी कहते हैं। 

इसके अलावा Brain cells और Tissue यानी मस्तिष्क की कोशिकाएं और ऊतक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और जल्दी खत्म होने लगते हैं। ऐसी परिस्थिति में मरीज किसी भी तरह की प्रवत्ति करने में सक्षम नहीं होता है। यह एक Emergency Condition कहलाती है।  

Symptoms of Brain Strokes Image Credit: Verywellhealth

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण क्या हैं? (Brain Stroke Symptoms)

वैसे तो हार्ट अटैक के लक्षणों को जल्दी से पहचान लिया जाता है। लेकिन ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण को पहचानने में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। मरीज को जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुंचना अनिवार्य है। 

brain Stroke

brain Stroke Image Credit: Frontires

  • ब्रेन स्ट्रोक का पहला लक्षण है बोलते वक्त जुबान का लड़खड़ाना। 
  • यदि बोलते में दिक्कत आए या फिर चलने-फिरने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर का संपर्क करना आवश्यक है। 
  • किसी भी तरह की शारीरिक तकलीफ नजर आए तो, 4 घंटे के भीतर मरीज को इलाज मिलना जरूरी है। 
  • आँखों से देखने में धुंधलापन भी इसका एक लक्षण है। 
  • स्ट्रोक के कारण मरीज को मानसिक के साथ शारीरिक प्रभाव भी पड़ता है। 
  • यदि व्यक्ति का चेहरा सीधा न दिखाई दे तो वह भी एक लक्षण है। 
  • शरीर के साथ साथ बाजुओं के एकदम से कमजोर पड़ जाना। 

न्यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि, अगर स्ट्रोक के किसी भी पेशेंट को शुरुआती 3 घंटों में इलाज मिल जाए तो स्ट्रोक के प्रभाव को पूरी तरह से नाबूद किया जा सकता है। और व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। स्ट्रोक को पहचानने का एक फार्मूला भी है- STR S-Smile, T-Talk, R-Raise

  • S- Smile मरीज को स्माइल करने के लिए कहें। 
  • T- Talk आसान वाक्य बोलने का प्रयास कराएं। 
  • R- Raise दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहें। 

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Brain Stroke Act Image Credit: CDC

ब्रेन स्ट्रोक का क्या है इलाज: (Prevention of Stroke)

ब्रेन स्ट्रोक किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकता है। लेकिन व्यक्ति को 45 साल के ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। ब्रेन स्ट्रोक को मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीकी का उपयोग करके व्यक्ति को बचाया जा सकता है। यह तकनीकी न ही स्ट्रोक से बचाती है बल्कि व्यक्ति की विकलांगता की संभावना को भी कम भी करती है। इस प्रक्रिया में एक रिट्रीवर स्टेंट डिवाइस पेट एवं जांघ की बीच की जगह से रक्तवाहिनी में डाला जाता है और आर्टरी से होते हुए दिमाग तक पहुँचाया जाता है, जहाँ इसका उपयोग खून के थक्के को हटाने के लिए किया जाता है।

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परीक्षणों से पता चला है कि यदि मरीज स्ट्रोक के लक्षण शुरू होने के 6 से 8 घंटे के भीतर इस प्रक्रिया को कराता है तो उसके जीवित रहने की संभावना और जीवन की गुणवता काफी बढ़ जाती है। मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक राजस्थान के चुनिंदा केंद्रों में ही उपलब्ध है। और मरीज को डायबीटीज, बढ़ता हुआ कोलेस्ट्रॉल, हाइपर टेंशन और मोटापा आदि पर कंट्रोल करने की अत्यधिक आवश्यकता है। 

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