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जानिए, भारत में कोविड-19 केस के बढ़ोत्तरी की क्या है वजह?

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double mutationपिछले कुछ महीनों से भारत के कई राज्यों में कोविड-19 केसों की रफ्तार तजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। इस रफ्तार को कोरोना की दूसरी लहर बताया जा रहा है। कोविड-19 (Covid-19) की दूसरी लहर नवजात शिशुओं और बच्चों के लिए काफी  खतरनाक साबित हो रही है। पिछले 30 दिनों में गुजरात राज्य के कई शहरों में 286 बच्चे संक्रमण से ग्रसित हो चुके हैं। जिनमें 1o साल तक के बच्चों की संख्या शामिल हैं। वहीं सूरत में यह संक्रमण 14 दिन के नवजात शिशु के लिए जानलेवा साबित हुआ। भारत के कई राज्यों जैसे कि- पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक,केरल, छतीसगढ़ और गुजरात में दिन-प्रतिदिन विकट परिस्थितियाँ सामने आती जा रही है। 

corona

कोरोना वायरस के सेकंड स्ट्रेन में नए वैरिएंट का रिसर्च सामने आया है। नेशनल सेंटर फ़ॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC)  की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में नोवेल कोरोना वायरस का “नया डबल म्युटेंट वैरीएंट” पाया गया है। डबल म्यूटेंट एक अलग वैरिएंट है, यह तेजी से लोगों को संक्रमित कर रहा है।   

आइए जानते हैं, ‘डबल म्यूटेंट’ क्यूँ तेजी से संक्रमित हो रहा है: 

कोरोना की यह दूसरी लहर काफी घातक इसलिए हो रही है क्यूंकि बच्चों में फैल रहे संक्रमण के साथ ही RT-PCR (आरटीपीसीआर) जांच में इनके लक्षणों की पहचान नहीं हो पा रही है। जिससे कि यह वायरस मनुष्य के फेंफड़ों में तेजी से फैल रहा है। 2,3 दिनों के अंतराल में 40 से 30% नुकसान पहुँचा रहा है। क्यूंकि डबल म्यूटेंट के नए वैरिएंट को पुरानी RT-PCR कीट डिडेक्ट करने में सफल नहीं है क्यूंकिआरटीपीसीआर जांचों की संवेदनशीलता और विशिष्टता कोरोना के पहले चरण के रिसर्च और सैम्पल के आधार पर बनी है। जिसमें इसमें ब्रिटेन के वायरस बी.1.1.7 के 736 पॉजिटिव नमूने, दक्षिण अफ्रीकी वायरस लिनिएज (बी.1.351) के 34 पॉजिटिव नमूने और ब्राजील लिनिएज (पी.1) वायरस का एक नया मामला सामने आया था। वहीं भारत में E484क्यू और L452आर म्यूटेशन अंशों वाले डबल म्यूटेंट पाए गए हैं। जिससे संक्रमण विकराल रूप धारण कर रहा है। 

हाँलकि, भारतीय सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी)(INSACOG) की रिपोर्ट  के मुताबिक, भारत में इस्तेमाल हो रही आरटीपीसीआर जांच से ये म्यूटेशंस बच नहीं सके हैं, क्योंकि भारत में हो रही आरटीपीसीआर जांच दो ज्यादा जीन्स को लक्षित करती है। आरटीपीसीआर जांचों की संवेदनशीलता और विशिष्टता पहले की तरह बनी हुई है।  कोविड 19 वारयस अपना रूप बदल रहा है और भारत के साथ ही कई देशों में कई म्यूटेशंस पाए जा चुके हैं, इनमें यूके (17 म्यूटेशंस), ब्राजील (17 म्यूटेशंस) और दक्षिण अफ्रीका (12 म्यूटेशंस) वैरिएंट्स शामिल हैं। इन वैरिएंट्स की फैलने की क्षमता काफी ज्यादा है। यूके वैरिएंट ज्यादातर यूके, पूरे यूरोप में पाया गया और एशिया व अमेरिका तक में फैल गया है।  इन म्यूटेशंस के सामने आने से प्रबंधन की रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो जांच, पता लगाने, नजर रखने और उपचार पर केन्द्रित बनी हुई है। कोविड-19 के प्रसार पर रोक के लिए मास्क का इस्तेमाल सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बना हुआ है। 

Corona(Double mutation)

‘डबल म्यूटेंट’ क्या है? 

हालांकि, भारतीय सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) द्वारा दूसरा म्यूटेंट भारत में मौजूद कोरोना वायरस के बारे में जानने के लिए किए गए जीनोम सीक्वेंसिंग में सामने आया था। जीनोम सीक्वेंसिंग से देश में कोरोना वायरस के 771 चिंताजनक और एक नए तरह के वैरिएंट का पता लगा है। इसमें ब्रिटेन के वायरस बी.1.1.7 के 736 पॉजिटिव नमूने, दक्षिण अफ्रीकी वायरस लिनिएज (बी.1.351) के 34 पॉजिटिव नमूने और ब्राजील लिनिएज (पी.1) वायरस का एक नया मामला सामने आया था। तभी  महाराष्ट्र से जो नमूने लिए थे उनमें E484क्यू और L452आर म्यूटेशन के अंशों वाला म्यूटेंट मिला था जिसे ‘डबल म्यूटेंट’ कहा जा रहा है।  डबल म्यूटेंट एक अलग वैरिएंट है जो कि ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, जर्मनी, आयरलैंड, नामीबिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम, यूएसए जैसे कई देशों में पाया गया है। लेकिन उन देशों में इस वैरिएंट के ज्यादा फैलने की क्षमता अभी तक स्थापित नहीं हुई है। वहीं भारत में E484क्यू और L452आर म्यूटेशन अंशों वाले डबल म्यूटेंट पाए गए हैं।  

भारतीय सार्स कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी)(INSACOG) की रिपोर्ट के मुताबिक 

15 april 2021 तक 10 नामित आईएनएसएसीओजी प्रयोगशालाओं में 13,614 डब्ल्यूजीएस नमूने संसाधित किए जा चुके हैं। इनमें से जांच के दौरान 1,189 नमूने भारत में सार्स कोविड-2 के खतरनाक वैरिएंट के लिए पॉजिटिव पाए गए हैं। इसमें यूके वैरिएंट्स के 1,109 नमूने; दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट के 79 नमूने और ब्राजील वैरिएंट का 1 नमूना शामिल हैं। आईएनएसएसीओजी ने जिस समय से अपना कार्य शुरू किया है उसने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ओर से साझा किए गए 10787 पॉजिटिव सेंम्पल में से इस वायरस के 771 चिंताजनक प्रकारों (वीओसी) का पता लगाया है। इसमें ब्रिटेन के वायरस (बी.1.1.7.) लिनिएज के 736 पॉजिटिव नमूने भी हैं। दक्षिण अफ्रीकी वायरस लिनिएज (बी.1.351) के 34 नमूने भी पॉजिटिव पाए गए हैं। एक नमूना ब्राजील लिनिएज (पी.1) के वायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए हैं। ये वीओसी युक्त नमूने देश के 18 राज्यों में चिन्हित किए गए हैं। कोरोना वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग और इसका विश्लेषण अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों से लिए गए नमूनों, वीओसी के संपर्क में आए पॉजिटिव नमूनों और अधिकतर राज्यों में सामुदायिक स्तर पर एकत्र किए गए नमूनों से किया गया है। ऐसे ही केरल, महाराष्ट्र जैसे राज्यों से नमूनों की जांच की गई। 

हमारा निवेदन है हमारे सभी वाचकों से कृपया मास्क पहनें, घर पर रहें और स्वस्थ रहें। 

मुद्दे की बात: ध्यान देने वाली बात यह है कि, आखिर सरकार ‘डबल म्युटेंट वैरीएंट से फैल रहे संक्रमण को लेकर क्या अहम निर्णय लेगी। बेजान और बेगुनाह बच्चों की जान का जिम्मेदार कौन होगा? लॉक डाउन होगा या नहीं? और भी अधिक जानकारी के लिए बने रहे OTT India के साथ.. 

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