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जानें FATF के बारे में, जिसकी ग्रे लिस्ट में लंबे समय से है पाकिस्तान का नाम

FATF
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फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने गुरुवार को घोषणा की कि पाकिस्तान अब भी ‘ग्रे लिस्ट’ में ही रहेगा, जहां वह 2018 से है और अब तुर्की, जॉर्डन और माली इसमें शामिल होंगे। इसका मतलब है कि इन देशों पर मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकी वित्तपोषण और प्रसार वित्तपोषण के लिए निगरानी बढ़ेगी। 

क्या है FATF?

आपको बता दें की फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) एक अंतर-सरकारी संस्था है जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इस संस्था का काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगाह रखना है।

क्यों है पाकिस्तान इस ग्रे लिस्ट में?

पाकिस्तान ने अभी तक FATF के मानदंडो को पूरा नहीं किया था जिस वजह से वो अब भी ग्रे लिस्ट में ही रहेगा। FATF का यह सत्र 19 अक्टूबर को शुरू हुआ था और तीन दिन चला था। आपको बता दें कि जून में FATF ने पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए वित्तपोषण बढ़ाने और काले धन पर रोक न लगाने पर ग्रे लिस्ट में रखा था। अब अगर पाकिस्तान सुधार नहीं करता तो इससे उसकी आर्थिक स्थिति का बैड़ा गर्क होना तय है।

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इस साल जून में, FATF ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने में विफल रहने के लिए पाकिस्तान को अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ पर बरकरार रखा था, जिससे आतंकी वित्तपोषण हुआ था। FATF ने इस्लामाबाद को हाफिज सईद और मसूद अजहर सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवाद फैलाने वाले आतंकवादियों की जांच और मुकदमा चलाने के लिए कहा। पाकिस्तान ने इस बात का दिखावा तो किया की वे जांच कर रहे है लेकिन जमीनी स्तर पर वाकई में कोई काम नहीं किया। ग्रे लिस्ट में होने के कारण, पाकिस्तान के लिए इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF), वर्ल्ड बैंक, एशियाई डेवलपमेंट बैंक (ADB) और यूरोपीय संघ से वित्तीय सहायता प्राप्त करना काफी मुश्किल हो गया है। पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से हटाने का फैसला अप्रैल 2022 में FATF के अगले सत्र में लिया जा सकता है।

FATF के अध्यक्ष ने कही ये बातें

एक ब्रीफिंग में, FATF के अध्यक्ष मार्कस प्लीयर ने कहा कि FATF द्वारा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे आतंकवादी संगठनों पर कार्रवाई करने के लिए बार-बार पूछे जाने के बाद, पाकिस्तान को “प्रदर्शन” करना होगा कि उसने कार्रवाई की है और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों पर प्रभावी ढंग से मुकदमा चलाया है।

FATF के अध्यक्ष प्लीयर ने घोषणा की कि मॉरीशस और बोत्सवाना को सूची से हटा दिया गया है, जबकि एपीजी, ईएजी और वैश्विक नेटवर्क “अफगानिस्तान में स्थिति की बारीकी से निगरानी करेंगे, जिसमें शामिल होंगे देश में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण जोखिमों से संबंधित कोई भी बदलाव।”

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वित्तीय निकाय ने अफगानिस्तान में विकसित हो रहे मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण जोखिम पर “चिंता” व्यक्त की। मार्कस प्लीयर ने कहा, “हम अफगानिस्तान की स्थिति पर हाल के UNSC प्रस्तावों की पुष्टि करते हैं और मांग करते हैं कि देश का इस्तेमाल, आतंकवादी कृत्यों की योजना बनाने या वित्तपोषित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।”

प्लीयर ने इस बात से इनकार किया कि यह भारत का दबाव था जिसके कारण पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा गया। उन्होंने कहा, ‘FATF एक तकनीकी संस्था है और हम अपने फैसले आम सहमति से लेते हैं। यह एक देश नहीं बल्कि 39 क्षेत्राधिकार है और निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाता है कि एक क्षेत्राधिकार को निगरानी में रखा जाना चाहिए, ” प्लीयर ने जवाब दिया जब उनसे पूछा गया की क्या भारत था जिसकी वजह से जून 2018 से पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखा गया। 

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