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Homeहेल्थये ‘लॉन्ग कोविड’ क्या है ?

ये ‘लॉन्ग कोविड’ क्या है ?

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लॉन्ग कोविड(Long Covid).. आज कल ये शब्द ज्यादा सुनने मे आ रहा है। लोग इस परिस्थिति से ज्यादा परेशान हो रहे है। जिसमे शरीर से वायरस जाने के बाद भी उसके लक्षण नही जाते। आइये जानते है लॉन्ग कोविड के बारे मे सब कुछ।

कइ लोग एसे है जो कोरोना से रिकवर तो हो गये लेकिन अभी भी थकान, सिरदर्द, खांसी, स्मेल और टेस्ट ठीक से नहीं आना जैसी शिकायतो का सामना कर रहै है। लोगो की मेन्टल हेल्थ(mental health) पर भी इसका असर पडा है। यही कारण है की डॉक्टर्स और विशेषज्ञोने भी इसपे ध्यान देना शूरू किया है। स्वास्थ्य विभाग भी यह स्थिति से चिंतित है की कुछ लोगो मे कोरोना इन्फेक्शन ठीक होने के बाद भी उसके लक्षण क्यूं नही जा रहै। विशेषज्ञ भी ये जानने की कोशिष कर रहै है की आखिर ये लक्षण कितने दिनो तक परेशान कर सकते है। इस समस्या को लॉन्ग कोविड कहा गया है।

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लॉन्ग कोविड किसे कहैते है ?

ये शब्द कहा से आया इसके बारे मे बात करे तो लंदन की एलिसा पेरेगो नाम की महिलाने कोविड-19 से रिकवर होने के बात भी उसके लक्षण कायम रहेने की वजह से इस परिस्थिति के लिये लॉन्ग लोविड शब्द का उपयोग किया था। यह परिस्थिति मे वायरस शरीर से नीकल जाने के बाद भी इसके लक्षण 3 से 12 हफ्ते तक या फिर 12 हफ्ते के बाद भी रहेते है। RT-PCR  टेस्ट मे पता चलता है की मरीज रिकवर हो चुका है लेकिन क्लिनिकल लक्षण अभी तक गये नहीं है। लॉन्ग कोविड को 2 स्टेज मे बाटा गया है। पहेला स्टेज है पोस्ट एक्यूट कोविड जिसमे कोरोना के लक्षण 3 से 12 हफ्ते तक बने रहेते है और दुसरा स्टेज है क्रोनिक कोविड जिसमे 12 हफ्ते के बाद भी लक्षण नही जाते।

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लॉन्ग कोविड के लक्षण क्या है ?

इसपे हुए एक अध्ययन मे बहार आया है की कोविड-19 से रिकवर होने के बाद 87.4 %  मरिज ऐसे थे जिनमे एक लक्षण कायम रहा। सबसे ज्यादा लोगो को थकान की शिकायत थी। कुछ लोगो मे खांसी, सिरदर्द, डायरिया जैसे लक्षण भी दिखे। कुछ लोगो को धडकन तेज होना और सांस फूलना जैसी शिकायते हुइ।

एसा बिलकुल नहीं है की लॉन्ग कोविड सिर्फ कोरोना के गंभीर लक्षण वाले लोगो मे भी देखने को मिलता है। जो घर पर ही रिकवर हुए है एसे मरिजो मे भी लॉन्ग कोविड के लक्षण देखने को मिले है। एसे कई मरीज पाये गये जो छ महीने मे कइ बार डॉक्टर के पास गये।

image : icope uk

लॉन्ग कोविड मे मेन्टल हेल्थ को भी नुकसान

लॉन्ग कोविड के कारण एन्झाइटी और डिप्रेशन के लक्षण भी मरिजो मे देखने को मिले। कइ एसे मरिज है जिन्हे कोविड-19 से रिकवर होने के बाद साइकायाट्रीस्ट के पास जाना पडा। कोरोना के कारण कइ लोगो को फ्रेन्ड्स और फेमिली से दूर रहेना पडा। जिसका असर उनकी मेन्टल हेल्थ के उपर पडा। भारत मे अभी तक लॉन्ग कोविड से जुज रहे मरिजो के आंकडे या अभ्यास सामने नही आया लेकिन कोरोना की दुसरी लहेर मे संक्रमित हुए मरिजो की संख्या को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है की कोरोना से रिकवर होने के बाद भी एक साल तक कोरोना के मरिजो पर नजर रखनी चाहिये। तभी हम जान सके गे की कितने लोग पुरी तरह से रिकवर होगये है और कितने लोग लॉन्ग कोविड से परेशान है। लॉन्ग कोविड से परेशान लोगो को मल्टीडिसिप्लिनरी और मल्टी केयर अप्रोच से ठीक कीया जा सकता है।

आशा रखते है की लॉन्ग कोविड और एसे जितने भी शब्द पीछले दो सालो मे सुनने मे आये है उनसे जल्दी छुटकारा मिले और हम कोरोना महामारी से बहार आ सके।

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