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इस वर्ष 200 से ज्यादा देश ‘जलवायु परिवर्तन’ के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में शामिल

Nuclear energy
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इस वर्ष 2021 में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत समेत 200 से ज्यादा देश शामिल होंगे। जलवायु परिवर्तन सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (United Nations Framework Convention on Climate Change-UNFCC) के निर्णय लेने वाले निकाय को संदर्भित करता है। ‘संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ इस वर्ष के नवंबर महीने में किया जाएगा। यह 26वां सत्र नवंबर 2021 में ग्लासगो में ब्रिटेन द्वारा आयोजित किया जाएगा। 

जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का विषय: 

ब्रिटेन में होने जा रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में इस वर्ष पृथ्वी को गर्म करने वाली ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को तेज़ी से कैसे घटाया जाए। इस बात पर चर्चा की जाएगी। बहुत से ऐसे देश हैं जो कि जलवायु परिवर्तन के लिए हानिकारक गैसों का पता लगाने में लगे हुए हैं लेकिन कई सारी कोशिशों के बावजूद हानिकारक गैसों के पर नियंत्रण नहीं ला पा रहे हैं। इसलिए इस सम्मेलन में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। और उसका निवारण लाया जाएगा। क्या न्यूक्लियर एनर्जी यानी परमाणु ऊर्जा मददगार साबित हो सकती है? इन बातों पर भी चर्चा की जाएगी। 

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परमाणु ऊर्जा क्या है? (What is Nuclear Power)

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खनिजो पदार्थ में अणुओं तथा परमाणुओं के विघटन से एक प्रकार की ऊर्जा शक्ति उतपन्न होती है जिसे परमाणु ऊर्जा कहते है। अर्थात परमाणु के नाभिक की ऊर्जा को ‘परमाणु ऊर्जा’ कहा जाता है।
प्रत्येक परमाणु के केंद्र में दो प्रकार के कण होते हैं, जिन्हें प्रोटोन और न्यूट्रॉन कहा जाता है। प्रोटोनों और न्यूट्रॉनों को आपस में जोड़कर रखने वाली ऊर्जा को ही परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) कहा जाता है। भारत में परमाणु ऊर्जा के केंद्र छह है।

  1. प्रथम केंद्र-सन 1969 में मुम्बई के निकट तारापुर पर स्थित है। यह एशिया का सबसे बड़ा केंद्र है।
  2. दूसरा केंद्र– राजस्थान में कोटा के समीप रावतभाटा केंद्र, राणा प्रताप सागर बांध पर स्थित है।
  3. तीसरा केंद्र– तमिलनाडु राज्य में चेन्नई के निकट कलपक्कम में स्थित है। यह परमाणु शक्ति गृह स्वदेशी है।
  4. चौथा केंद्र– उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर में गंगा नदी के किनारे नरौरा नामक स्थान पर स्थित है। 
  5. पाँचवा केंद्र– गुजरात राज्य में ताप्ती नदी पर काकरापारा नामक स्थान पर स्थापित किया गया है। 
  6. छठवां केंद्र– छठा केंद्र कर्नाटक राज्य के केगा नामक स्थान पर है। 

परमाणु ऊर्जा का महत्त्व:- (Importance of Nuclear Power)

परमाणु ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन में किया जा सकता है। इस ऊर्जा को दो प्रक्रियाओं द्वारा प्राप्त की जाता  है, जिन्हें ‘नाभिकीय विखंडन’ व ‘नाभिकीय संलयन’ कहा जाता है। नाभिकीय संलयन में छोटे-छोटे परमाणुओं के जुड़ने से एक बड़े अणु का निर्माण होता है जिससे ऊर्जा मुक्त होती है। इसका सही उदाहरण ‘सौर ऊर्जा’ है। इसके विपरीत नाभिकीय विखंडन में विशाल अणु छोटे-छोटे परमाणुओं में टूट जाते हैं तथा ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र बिजली का उत्पादन करने के लिये केवल ‘नाभिकीय विखंडन’ प्रक्रिया का ही उपयोग कर सकते हैं।

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भारत में परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य:- 

  • भारत के पास एक अति महत्त्वाकांक्षी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम है, जिससे अपेक्षा है कि वर्ष 2024 तक यह 14.6 गीगावाट बिजली का उत्पादन करेगा, अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2032 तक बिजली उत्पादन की क्षमता 63 गीगावाट हो जाएगी। 
  • भारत का लक्ष्य है कि वर्ष 2050 तक देश के 25% बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का योगदान रहेगा। 
  • पहले 34 वर्षों तक इसके परमाणु संयंत्रों अथवा पदार्थों के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 
  • भारत पूर्व के व्यापार प्रतिबंधों और स्वदेशी यूरेनियम के अभाव में भारत थोरियम के भंडारों से लाभ प्राप्त करने के लिये एक ‘परमाणु ईंधन चक्र’ (Nuclear fuel cycle) का विकास कर रहा है।
  • भारत का परमाणु ऊर्जा भंडार 293 बिलियन टन हैं, जिसमें पूर्वी राज्यों का अत्यधिक योगदान है। जिनमें  झारखण्ड, ओड़िसा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। 
  • भारत के पास पाँच बिजली ग्रिड हैं –उत्तरी, पूर्वी, उत्तर-पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी।
  • दक्षिणी ग्रिड के अलावा इसके अन्य सभी ग्रिड आपस में जुड़े हुए हैं।
  • इन सभी ग्रिडों का संचालन राज्य स्वामित्व वाले भारत के बिजली ग्रिड निगम (Power Grid Corporation of India) द्वारा किया जाता है।

पूरे विश्व में लगभग 10 प्रतिशत बिजली न्यूक्लियर रिएक्टर्स के द्वारा पैदा हो रही है। 

विश्व के 55 देश लगभग 250 अनुसंधान रिएक्टरों का संचालन करते हैं।

देखें यह वीडियो: तुर्की के लिए विकट समस्या

आपको बता दें, आज 31 देश 390,000 मेगावाट क्षमता के कुल 447 वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का संचालन कर रहे हैं। आपको बता दें, विश्व के 16 देश एक चौथाई बिजली उत्पादन के लिये परमाणु ऊर्जा पर निर्भर हैं। वैसे तो फ्राँस अपनी ऊर्जा का तीन चौथाई हिस्सा परमाणु ऊर्जा से प्राप्त करता है, जबकि बेल्जियम, फ़िनलैंड, हंगरी, स्वीडन, स्विट्ज़रलैंड, स्लोवेनिया और युक्रेन आदि देश एक तिहाई से अधिक बिजली उत्पादन के लिये परमाणु ऊर्जा पर निर्भर हैं। 

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