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आपने सुनी है क्या, बोलने वाली गुफा की कहानी!

story of cave
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अक्सर बचपन में हमने ऐसी कई कहानियाँ सुनी हैं, और उन सभी कहानियों से हमने अपने जीवन में बहोत कुछ सीखा है। तथा कहानियों से मिली सीखों को अनुकरण भी किया है। आज हम एक ऐसी ही कहानी की बात करेंगें- जिसका शीर्षक है बोलने वाली गुफा। 

यह उन दिनों की बात है जब एक जंगल में शेर का बहोत ही आतंक था। खुद को जंगल का राजा बताकर बाकी के लोगों पर अत्याचार करता था। जंगल के बाकी के जानवर खुद की रक्षा भी नहीं कर पा रहे थे। इस शेर से जंगल के सभी जानवर थर-थर कांपते थे। वह हर रोज जंगल के जानवरों का शिकार करता था और अपनी पेट पूजा जानवरों को खाकर किया करता था। 

एक दिन जंगल के राजा के हाँथ एक भी शिकार नहीं लगा:- 

एक दिन जंगल का राजा शेर पूरे दिन जंगल में भटकता रहा, लेकिन उसे एक भी शिकार नहीं मिला। भटकते-भटकते शाम हो गई और भूख से राजा की हालत खराब हो चुकी थी। शेर खाने की तलाश में काफी आगे निकाल गया था। तभी शेर को एक गुफा दिखाई दी। शेर ने सोचा कि क्यों न इस गुफा में बैठकर गुफा के मालिक का इंतजार किया जाए। इससे कम से कम आज रात के मेरे खाने का इंतेजाम तो हो ही जाएगा। 

image Credit: JoJoTv

इसलिए शेर गुफा के अंदर जाकर बैठ गया। और अंदर बैठकर सपने देखने लगा। कि, जरूर कोई बड़ा सा जानवर इस गुफा में रहता होगा। उसका शिकार करने में बड़ा मजा आयेगा। और जैसे ही वो आएगा, तो उसे मारकर वही अपनी भूख मिटा लूँगा। यह सोचते सोचते शेर इंतजार करता रहा। लेकिन काफी देर हो चुकी थी और गुफा का मालिक अभी तक आया नहीं था। 

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गुफा का मालिक एक चालाक शियार था:- 

शेर को इस बात कि जरा भी भनक नहीं लगी कि गुफा का मालिक एक चालक लोमड़ी है। जो कि दिन भर बाहर रहती थी और रात को ही अपनी गुफा में आकार सोती थी। जब वह रात को अपनी गुफा में वापस लौट रही थी, तो उसने देखा कि गुफा के बाहर शेर के पंजों के निशान हैं। वह तुरंत समझ गई कि जरूर गुफा के अंदर कोई घुसा है, मुझे ऐसे अचानक से अंदर नहीं जाना चाहिए। क्यूंकी पंजे के निशान गुफा के अंदर जाने के हैं, लेकिन बाहर आने के नहीं हैं। इसलिए लोमड़ी को विश्वास हो गया कि शेर गुफा के अंदर ही है। अंदर जाने से पहले लोमड़ी को एक तरकीब सूझी। इसलिए उसने अपनी तरकीब शेर को बाहर निकालने के लिए अपनाई। 

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image credit: hindishortstories

लोमड़ी की नई तरकीब हुई सफल:- 

लोमड़ी ने बचने के लिए तरकीब अपनाई, लोमड़ी ने बाहर से आवाज लगाना शुरू किया। अपनी पुष्टि करने के लिए लोमड़ी ने आवाज लगाई यह सुनकर गुफा में बैठा शेर एकदम सतर्क हो गया। और मन ही मन खुश हो गयाऔर सोचने लगा कि अब आज के खाने का इंतेजाम तो हो जाएगा। आज अच्छा खासा भोजन मिलने वाला है। 

Image Credit: maihindu

लोमड़ी ने गुफा के बाहर से ही आवाज लगाई, “अरी ओ गुफा! क्या बात है, आज तुमने मुझे आवाज नहीं लगाई। रोज तुम पुकारकर बुलाती हो, लेकिन आज बड़ी चुप हो। ऐसा क्या हुआ है?”

गुफा के अंदर बैठे शेर ने सोचा कि, “हो सकता है यह गुफा रोज आवाज लगाकर इस लोमड़ी को बुलाती है तभी वह अंदर आती है, लेकिन आज मेरे वजह से बोल नहीं रही है। कोई बात नहीं, आज मैं ही इसे पुकारता हूं।” यह सोचकर शेर ने जोर से आवाज लगाई, “आ जाओ मेरे प्रिय मित्र लोमड़ी। अंदर आ जाओ।”

इस आवाज को सुनते ही लोमड़ी को पता चल गया कि शेर अंदर ही बैठा है। और लोमड़ी समयसर गुफा के बाहर से ही भाग गई। और लोमड़ी ने अपनी चालाकी सही जगह दिखाकर शेर का भोजन बनने से बच गई। 

कहानी का मर्म: कहानी से यह सीख मिलती है कि, चाहे कितनी भी मुश्किल घड़ी क्यूँ ना हो, लेकिन विकट परिस्थितियों में व्यक्ति को हमेंशा अपनी बुद्धि का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। क्यूंकी यदि बुद्धि का इस्तेमाल किया जाए तो हल आसानी से निकाला जा सकता है। 

ऐसी ही रोचक कहानियाँ आपके समक्ष हम लाते रहेंगे। तब तक के लिए देश और दुनिया की खबरों के लिए बने रहें OTT INDIA पर.. स्वस्थ रहें। 

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