Ott India News Logo
Recent Posts
Connect with:
Monday / May 16.
Homeभक्तिशिरडी के साई बाबा की समाधि का क्या है रहस्य ?

शिरडी के साई बाबा की समाधि का क्या है रहस्य ?

Share Now

‘सबका मालिक एक’

शिरडी ( SHIRDI ) के साईं बाबा के दर्शन के लिए भक्त दूर दूर से आते है। माना जाता है कि शिरडी साईं बाबा की कर्मस्थली होने के साथ-साथ यही देह त्याग किया था। जिस कारण हर साल लाखों लोग दर्शन करने के लिए शिरडी पहुंचते है। हर गुरुवार को भक्तों की लंबी लाइन इस मंदिर में लगती है। क्योंकि साईं बाबा को चमत्कारी मानी जाता है। वह पहले बाबा शिरडी आए थे और 1918 तक वो यहीं रहे थे. शिर्डी, महाराष्ट्र ( MAHARASTRA )  के अहमदनगर जिले की राहटा तहसील का एक कस्बा है। यहीं पर विश्‍वप्रसिद्ध संत सांईं बाबा ने समाधि ली थी। यहां दुनियाभर से सांईं बाबा ( SAI BABA ) के भक्त उनके समाधि दर्शन के लिए आते हैं। सांईं बाबा ने शिर्डी में यहीं 15 अक्टूबर दशहरे के दिन 1918 में समाधि ली थी।  तभी से यहाँ समाधी के दर्शन के लिए भक्त दूर दूर से आते है। अपनी मनोकामनाओ को पूर्ण के लिए कई भक्त चढ़ावा भी चढ़ाते है।

यह भी पढ़े : बालाकोट एयर स्ट्राइक के दौरान दो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं

साई बाबा की समाधि का इतिहास :

साई बाबा की समाधि IMAGE SOURCE : GOOGLE

साई बाबा के दर्शन मात्र से भक्त धन्य हो जाते है। भक्त बहोत आस्था और उम्मीद के साथ दर्शन के लिए आते है।  साईं बाबा के दशहरे के दिन समाधि लेने का रहस्य क्या है? इससे पहले उन्होंने रामविजय प्रकरण क्यों सुना? इस प्रकरण में कथा है कि राम ने रावण से 10 दिनों तक युद्ध लड़ा था और दशमी के दिन रावण मारा गया था। रावण के मारे जाने के कारण दशमी को ही दशहरा कहते हैं। इसी दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था इसलिए इसे विजयादशमी कहते हैं।

माना जाता है के, दशहरा के कुछ दिन पहले ही साईं बाबा ने अपने एक भक्त रामचन्द्र पाटिल को विजयादशमी पर ‘तात्या’ की मौत की बात कही थी। तात्या बैजाबाई के पुत्र थे और बैजाबाई साईं बाबा की परम भक्त थीं। इस कारण तात्या साईं बाबा को ‘मामा’ कहकर बुलाते थे। इसी कारण साईं बाबा ने तात्या को जीवनदान देने का निर्णय लिया था। जब साईं बाबा को लगा कि अब जाने का समय आ गया है, तब उन्होंने वझे को ‘रामविजय प्रकरण’ सुनाने की आज्ञा दी थी।

श्री वझे ने एक सप्ताह प्रतिदिन पाठ सुनाया। जिसके बाद साईं बाबा ने उन्हें आठों प्रहर पाठ करने की आज्ञा दी। श्री वझे ने उस अध्याय की द्घितीय आवृत्ति 3 दिन में पूर्ण कर दी और इस प्रकार 11 दिन बीत गए। फिर 3 दिन और उन्होंने पाठ किया। अब श्री वझे बिल्कुल थक गए थे इसलिए उन्हें विश्राम करने की आज्ञा मांगी। साईं बाबा अब बिल्कुल शांत बैठ गए और आत्मस्थित होकर वह अंतिम क्षण की प्रतीक्षा करने लगे। 27 सितंबर 1918 को साईं बाबा के शरीर का तापमान बढ़ने लगा था। इसके साथ ही उन्होंने अन्न-जल सब कुछ त्याग दिया था। साई बाबा के समाधिस्त होने के कुछ दिन पहले तात्या की तबीयत इतनी बिगड़ी कि जिंदा रहना मुमकिन नहीं लग रहा था लेकिन उसकी जगह साईं बाबा 15 अक्टूबर, 1918 को अपने नश्वर शरीर का त्याग कर ब्रह्मलीन हो गए।

शिरडी में मानो जैसे सन्नाटा छा गया था।  हर कोई आश्चर्य के साथ दुखी भी था।  यह समाधि सवा दो मीटर लंबी और एक मीटर चौड़ी है। समाधि मंदिर के अलावा यहां द्वारकामाई का मंदिर चावड़ी और ताजिमखान बाबा चौक पर सांईं भक्त अब्दुल्ला की झोपड़ी है। मान्यता है कि महज 16 वर्ष की उम्र में सांईं बाबा शिरडी आए थे और फिर वहीं रहने लगे।

IMAGE SOURCE : GOOGLE

साई बाबा की मूर्ति और समाधि की कुछ अनसुनी बाते :

साई बाबा मंदिर में बनी हुई मूर्ति का भी एक अनोखा रहस्य है । 1954 में जब साई बाबा की मूर्ति को बनाने के लिए मुंबई के बंदरगाह पर इटली से मार्बल आया था। आपको जानकर हैरानी होगी की आज तक यह कोई नहीं जान पाया है को वो मार्बल किसने भिजवाया था। इसके बाद साई बाबा की मूर्ति बनाने का काम वसंत तालीम को सोपा गया ।

मूर्ति बनाते समय जब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब वो निराश होकर बैठ गया और कहने लगा कि बाबा मुझे इतनी शक्ति दीजिए की में प्रतिमा बनाऊं, जो मनमोहक हो और दिल को छूने वाली हो। इसके बाद साई बाबा ने खुद दर्शन दिए और जिसके बाद ये आसन वाली मूर्ति बनाई गई । वैसे तो इसके बाद इस आसन वाली अब तक लाखो – करोड़ों मूर्तियां बन चुकी है, लेकिन शिरडी में विराजी मूर्ति की बात ही अलग है। इस मूर्ति की खासियत यह है की जब आप साई बाबा की ओर गौर से देखेंगे, तो लगता है की वे हमे देख रहे है। साथ ही में मृतिकार को भी यहाँ सच्ची आस्था और कलाकारी के लिए याद किया जाता है। साई बाबा और समाधि के दर्शन करते ही भक्तो के मन को अनोखी शांति की पूर्ति होती है।  आज भी लाखो की तादात में भक्त शिरडी के साई बाबा और समाधि के दर्शन के लिए जाते है।

 

अधिक रोचक जानकारी के लिए डाउनलोड करें:- OTT INDIA App

Android: http://bit.ly/3ajxBk4  

iOS: http://apple.co/2ZeQjTt 

No comments

leave a comment