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जब नागा साधु ने यौद्धा बन के मातृभूमि की रक्षा की!

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मध्यकालिन युग मे मुघल, अफघानी और तुर्की बर्बर आक्रांता बार-बार हमारे देश को लूंटने के लिये हमला कर रहे थे। तब हिंदु धर्म, उसमे लोगो की श्रध्धा, और संस्कृति को बचाने के लिये नागा साधु ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 8 वीं सदी मे जब आदि शंकराचार्यजी ने देखा की मुस्लिम आक्रांता हिंदु धर्म, मंदिरो और हमारी सनातन संस्कृति के लिये खतरा बन रहे है तब उन्होनें नागा साधु को मिलिट्री तालिम देने की ठान ली जिससे वो अपनी मा भारती और हिंदु धर्म को बचा सके। नागा साधु को सख्त मिलिट्री तालिम दी गई और फिर वो निर्भिक और शूरवीर योध्धा बन गये और फिर वे युध्ध मेदान मे दुश्मनो का सर्वनाश करने के लिये तूट पडते थे। नागा साधु का खौफ मुस्लिम राज्यो और आक्रांताओ में फेलना लगा।

Ahmed Shah Abdali

अफगानी साशक अहेमद शाह अब्दालीने चोथी बार भारत पर आक्रमण किया। तब भारत मे मुगघ इतने सशक्त नहीं थे और उत्तरी भारत मे कोइ सशक्त हिंदु साशक भी नहीं था। अफघानी इस परिस्थिति का फायदा उठा रहे थे। मुघल राजा आलमगीर के साथ उन्होंने संधि की और दिल्ली को लूंटने की अनुमति मांग ली और जनवरी 1757 मे उसने दिल्ली को लूंटा, मंदिरो को ध्वस्त किया लेकिन फिर भी वो खुश नही हुआ था। उसने अपने दो कमांडर नजीब खान और जहान खान को 20,000 अफघान सौनिको के साथ बल्लबगढ, मथुरा, आगरा और वृंदावन को लूंटने भेजा।

ऊसने उन दोनो को कहां की.. “मथुरा और वृंदावन हिंदुओ के लिये पवित्र भूमि है तुम वहा लूंट और आतंक मचाओं और जो भी मिले वो तुम्हारा होंगा। हिंदु काफिरो को मारो और उनके सर कलम करके अफगान केम्प में लाना और 5 रूपयै का इनाम ले जाना।”

अफगानी मथुरा पहोंचे। वहां मंदिर ध्वस्त किये, महिलाऔ की इज्जत लूंटी, पुरूषो के सर कलम कर दिये, बच्चो को गुलाम बना लिया। बहोत सारी महिलाये अपनी इज्जत बचाने के लिये यमुना मे कुद गई। बहोत सारे हिंदु खुद को बचाने के लिये सितला माता टेम्पल के पीछे एक गुफा मे छुप गये थे। अफगानी वहां भी जा पहोंचे और सब को मार दिया। सिर्फ 3 दिन मे मथुरा की धरती रक्त से लाल हो गइ थी। अफघानी आक्रांताओने 12 करोड की संपत्ति लूंटी, 6,000 हिंदु महिलाओ को काबूल मे बेचने के लिये गुलाम बनाया। मथुरा पर हुमले के बाद अफघानी वृंदावन पहोंचे और उसका भी वही हाल किया। फिर वो आगरा की तरफ बढना चाहते थे लेकिन सरदार खान को लगा की गोकुल को भी लूंट लेते है। 10,000 अफघान सैनिक थे।

एक और रोचक कहानी: जब नागा साधु ने यौद्धा बन के मातृभूमि की रक्षा की!

अब्दाली दिल्ली और मथुरा में मारकाट करता गोकुल तक आ गया और लोगों को बर्बरतापूर्वक काटता जा रहा था… महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहे थे और बच्चे देश के बाहर बेचे जा रहे थे, तब गोकुल में अहमदशाह अब्दाली का सामना नागा साधुओं से हो गया।

image : google

कुछ 5 हजार चिमटाधारी साधु तत्काल सेना में तब्दील होकर लाखों की हबसी, जाहिल जेहादी सेना से भिड गए। पहले तो अब्दाली साधुओं को मजाक में ले रहा था किन्तु कुछ देर में ही अपने सैनिकों के चिथड़े उड़ते देख अब्दाली को एहसास हो गया कि ये साधू तो अपनी धरती की अस्मिता के लिए साक्षात महाकाल बन रण में उतर गए।

तोप तलवारों के सम्मुख चिमटा त्रिशूल लेकर पहाड़ बनकर खड़े 2000 नागा साधू इस भीषण संग्राम में वीरगति को प्राप्त हो गए लेकिन सबसे बड़ी बात ये रही कि दुश्मनों की सेना चार कदम भी आगे नहीं बढ़ा पाई जो जहाँ था वहीं ढेर कर दिया गया या फिर पीछे हटकर भाग गया..

image : google

इसके बाद से ऐसा आतंक उठा कि अगर किसी मुस्लिम आक्रांता को यह पता चलता कि युद्ध में नागा साधू भाग ले रहे हैं तो वह लड़ता ही नहीं था । साहस और श्रध्धा के प्रतिक नागा साधु हमे सिखाते है की मातृभूमि की रक्षा कैसे करते है। उन्होंने अपनी जान की परवा किये बगैर गोकूल को बचाया। हर हर महादेव के नाद से पुरी युध्ध भूमि गूंज उठी थी। वो आवाज अफगानो के कान मे एसे गुंजने लगी की फिर उन्होंने कभी हिंदुओ पे हमला करने की हिंमत नहीं की।

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देश का इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ नहीं है कि आज हम औरंगजेब,  तैमूर,  अकबर जैसे बर्बर लुटेरो को तो याद रखते हैं,  पर इन भारतीय वीर योद्धाओं के बारें में कुछ नहीं जानते जिन्होंने पग पग देश धर्म के लिए अपने सर गवांए हैं

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