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मेंढक को बचाने से पर्यावरण बचेगा ?

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हर किसीने मोर का मनमोहक नृत्य जरूर देखा होगा. परंतु आज एक ऐसे जीव की बात करेंगे, जिसका नृत्य देखकर हर कोई दंग रह जाता है. बात है डांसिंग फ्रॉग की. प्रकृति के अनेक अजूबों में से एक अजूबा है The Dancing Frog आपने बिल्कुल सही सुना The Dancing Frog. भारत के जीव वैज्ञानिकों ने 14 अलग-अलग डांसिंग फ्रॉग की प्रजाति की खोज निकाली थी. इन प्रजातियों में सबसे हटके है KOTTIGEHAR DANCING FROG

कोट्टीगेहर डांसिंग फ्रॉग को कैसे पहचाने

इंसान की मुट्ठी से छोटा होता है KOTTIGEHAR DANCING FROG. डांसिंग फ्रॉग  2.2 सेन्टिमीटर से 3.5 सेन्टिमीटर तक बड़ा हो सकता है.  पीठ पर भूरे रंग के घब्बे होते है. कभी-कभी मादाओं में नारंगी रंग और काला रंग देखने को मिलता है.अंडरसाइड हल्का सफेद, भूरे रंग की भिन्नता देखने को मिलती है, गले पर धब्बे होते है. टेक्सोनोमी कोट्टीगेहर डांसिंग फ्रॉग को 1937 में खोजा गया था. यह भारत में मिलने वाली 24 प्रजातियों में से एक है. 

Image Credit-WIKIPEDIA

क्यू कहा जाता है डांसिंग फ्रॉग

जब पश्चिमी घाट में बारिश होती है तब यह मेंढक ताजा पानी के किनारे पर के पत्थर पर बैठकर कर जोर जोर से आवाज करते है. इसके साथ ही करते है उनका सबसे अनोखा बर्ताव.जिसे वैज्ञानिक फूट फ्लैगिंग कहते है.  यह बर्ताव में डांसिंग फ्रॉग एक पत्थर पर चढ़कर अपना पैर हवा में हिलाते है. पूरा पैर फैलाकर अपने वेब पंजे को चौड़ा करते है. फिर दूसरे पैर की बारी आती है. इसमें संगीत का काम बहता पानी का झरना और दूसरे मेंढकों की आवाज करती है. 

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Shreeram MV

जब नर टेरिटरी फाइट जीत जाते है, तब मादा नर को चुनती है और अपनी पीठ पर चढ़ने की अनुमति देती है.अनुमति मिलते ही नर मादा की पीठ पर चढ़ जाता है.  जब तक मादा अंडे नहीं देती तब तक मादा की पीठ पर नर चिपका हुआ रहता है. उथला पानी में मादा अंडे देती है और अपने पैर से खडा करके सारे अंडों को पानी में मिट्टी और कंकड़ से ढक देती है जिससे अंडे पानी में बह न जाये. जब तक बच्चें बाहर ना निकले तब तक निगरानी करते है. डांसिंग फ्रॉग माइक्रोक्सलिडे फैमिली में से आते है, जो कि 85 मिलियन से अधिक वर्ष पहले विकसित हुई है.

Image Credit-edgeofexistence

मेंढक को क्यों बचाना चाहिए

मेंढक पर्यावरण के सबसे संवेदनशील जीवों में से एक है. जो इंसान को कई तरह से फायदेमंद है. पहले के समय में जब कोयले की खान में लोग खुदाई करने जाते थे तब खुदाई करने वाले लोग उनके साथ एक केनेरी नाम का पक्षी ले जाते थे. जब कभी भी को कोयले की खान में कार्बन मोनोऑक्साइड निकलता तब केनेरी नामक पक्षी मर जाता जिससे कोयले की खान में से बहुत से लोग जिंदा निकल जाते थे. इस तरह मेंढक भी कुदरती आपदा के संकेत देते है जैसे की भूंकप. पर्यावरण के स्वास्थ्य का लिए भी संकेत देते है. और सबसे बड़ी बात मेंढक एक कुदरती पेस्ट कंट्रोलर है जिसमे से कई कीटक गंभीर बीमारियों के वाहक होते है. जिससे पेस्टिसाइड जैसे केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती और हम इस जहरीले केमिकल से बच सके. फ्रॉग और टोड इकोसिस्टम से खत्म हो जाते है तो इकोसिस्टम को गंभीर खतरा हो सकता है.

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अब यह प्रजाति अब मुख्य रूप से नारियल और काजू जैसी फसलों के कृषि विस्तार के बढ़ने के कारण खतरे में है. यह प्रजाति के लिए कोई भी आरक्षित क्षेत्र नहीं है. इस प्रजाति की वर्तमान जनसंख्या स्थिति को निर्धारित करने के लिए आगे सर्वेक्षण कार्य की आवश्यकता है. यह प्रजाति के मेंढक विश्व के सबसे खतरे में पड़े हुए जीवों में से एक है.  ऐसे अद्भुत जीवों को बचाकर ही हम पर्यावरण को बचा पाएंगे, खुद को बचा पाएंगे.  इस पर्यावरण दिन पर एक शपथ लें की पर्यावरण की रक्षा करेंगे एवं पर्यावरण को नुकसान नहीं करेंगे. 

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