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क्या भारत सरकार तालिबान से बातचीत करेगी?

क्या भारत सरकार तालिबान से बातचीत करेगी?
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तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने के बाद, हर कोई जानना चाहता है कि क्या भारत सरकार तालिबान शासन के तहत अफगानिस्तान की नई सरकार के साथ बातचीत करेगी। तालिबान के 20 साल बाद अफगानिस्तान में वापसी पर क्या भारत सरकार अब तालिबान से संपर्क करेगी?

तालिबान के प्रति भारत का रवैया नरम

सूत्रों के मुताबिक तालिबान के प्रति भारत सरकार का रवैया नरम होता दिख रहा है. भारत सरकार (Indian Government) ने तालिबान के साथ बातचीत के संकेत दिए हैं. सूत्रों ने कहा कि भारत सरकार ने तालिबान के साथ बातचीत करने का फैसला किया है. देश हित में जिस भी दल पर चर्चा की जरूरत होगी, उससे संपर्क किया जाएगा. इससे पहले, भारत सरकार ने तालिबान के साथ किसी भी संपर्क से इनकार नहीं किया था।

तालिबान से बात कर सकता है भारत

सूत्रों के मुताबिक अफगानिस्तान में नई सरकार बनने के बाद सभी पक्षों से राष्ट्रहित में बातचीत हो सकती है. हालांकि, अफगानिस्तान की नई सरकार को मान्यता देने पर दुनिया के किसी भी देश ने औपचारिक फैसला नहीं किया है. सूत्रों ने कहा कि जरूरत पड़ने पर तालिबान के साथ बातचीत हो सकती है। साथ ही अफगानिस्तान में बदले हालात और तालिबान की वापसी से भारत Indian Government जल्द ही इस पूरे मुद्दे पर एक नीति तैयार करेगा. इसके बाद तालिबान से बातचीत हो सकती है.

तालिबान के रुख पर आधारित होगा संपर्क

हालांकि, यह संपर्क कैसा दिखेगा यह भविष्य में तालिबान पर निर्भर करेगा. भारत के प्रति तालिबान का क्या रवैया है और वह भारत के हितों की रक्षा कैसे करता है. वर्तमान में, तालिबान अफगानिस्तान में अपनी सरकार चलाने के लिए अपने प्रयासों को तेज कर रहा है. इसके लिए अलग-अलग विभाग बनाकर जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

 

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भारत को अफगानिस्तान में समावेशी सरकार की उम्मीद

 “भारत अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार की उम्मीद करता है,” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताया. जिसमें सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व किया जाता ह.  मानवाधिकार परिषद को संबोधित करते हुए, भारत के स्थायी प्रतिनिधि इंद्रमणि पांडे ने कहा कि व्यापक प्रतिनिधित्व वाली सरकार अधिक स्वीकृति और वैधता प्राप्त करने में मदद करेगी. इंद्रमणि पांडे ने कहा कि अफगान महिलाओं की आवाज, अफगान बच्चों की उम्मीदों और अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए. भारत Indian Government )ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में स्थिरता का क्षेत्र में शांति और सुरक्षा से सीधा संबंध है। 

तालिबान शासन की मान्यता पर भारत के विचार

अफगानिस्तान में तालिबान शासन की मान्यता के संबंध में, भारत ने कहा है कि वह इंतजार करेगा और देखेगा कि चरमपंथी समूह देश को कैसे चलाता है और अन्य लोकतंत्र देश इसके बारे में क्या निर्णय लेते हैं. सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल से भी बात की और अफगानिस्तान सहित द्विपक्षीय, बहुपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। 

 पीएम मोदी और पुतिन के बीच अहम बातचीत

प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को 45 मिनट की चर्चा की, मुख्य रूप से अफगानिस्तान की स्थिति पर विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने अफगानिस्तान के क्षेत्र से आतंकवादी विचारधारा और नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में सहयोग बढ़ाने का इरादा व्यक्त किया. इस मुद्दे पर परामर्श के लिए एक स्थायी द्विपक्षीय चैनल बनाने पर भी सहमति हुई. सूत्रों ने कहा कि वार्ता ने यह स्पष्ट कर दिया कि रूस जैसे देश का भी मानना ​​है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने और अफगानिस्तान में बदलती परिस्थितियों को देखते हुए भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।  

 

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