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वर्ल्ड डायबिटीज डे – क्या होती है डायबिटिक रेटिनोपैथी, जानिए कहीं आप तो नहीं हैं शिकार

Diabetes
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कोरोना महामारी के बाद, बीमारियां बढ़ती जा रही है. हर रोज हम किसी नई बीमारी या वायरस के बारे में सुन रहे हैं. ऐसे में डायबिटीज भी बढ़ती चली जा रही है. और कोरोना के बाद बहुत लोग डायबिटिक रेटिनोपैथी का शिकार हो रहे है. डायबिटिक रेटीनोपैथी, आंख की एक गंभीर बीमारी है. इस बीमारी में, मरीज की आंखो में शुरूआत में धुंधलापन होता है फिर धीरे-धीरे वे पूरी तरह से अपनी दृष्टि खो देते हैं.

आपको बता दें कि वर्ल्ड डायबिटीज डे (World Diabetes Day) है और वर्तमान में भारत में 7 करोड़ लोग डायबिटीज का शिकार हैं. महामारी के बाद, टाइप – 2 और टाइप – 1 डायबिटीज सिर्फ शहर में ही नहीं बल्कि गांव में भी पायी जा रही हैं. मिली जानकारी के मुताबिक 2025 तक, रेटिनोपैथी से पीड़ित लोगों की संख्या में काफी वृद्धि होगी.

क्या है डायबिटिक रेटीनोपैथी

आसान भाषा में डायबिटिक रेटीनोपैथी एक ऐसी बीमारी है जो ब्लड शुगर से पीड़ित लोगों की रेटीना यानि आंख के पर्दे को प्रभावित करती है. डायबिटीज के चलते आंखों में धुंधलापन, कम दिखना, सूखापन, मोतियाबंद और रेटिना पर प्रभाव पड़ने से डायबिटिक रेटीनोपैथी की गंभीर तकलीफ हो सकती है. डायबिटीज के शिकार होने वाले 20 से 40 प्रतिशत लोगों में रेटिनोपैथी की शिकायत देखने मिलती है.

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क्या है इसके लक्षण

डॉक्टर्स के अनुसार शुरूआती कुछ सालों में डायबिटिक रेटीनोपैथी का पता नहीं चलता. लेकिन डायबिटीज मरीजों को अपनी बल्ड शुगर का खास ध्यान रखकर कंट्रोल करने की जरूरत है. अगर आंखों में दिक्कत हो, रेखाएं टेढ़ी दिखें, आंखें लाल हो, आंखों में खून आए या आंखों में लाल नसों का जाल बढ़ जाए तो आप डायबिटिक रेटीनोपैथी का शिकार हो सकते हैं. अगर ऐसे कोई लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और चेकअप के लिए जाएं. जिन लोगों को डायबिटीज है वे साल में एक बार अपनी आंखों का चेकअप जरूर करवाएं.

कितने स्टेज होते हैं

इसमें कुल चरण यानि स्टेज होते हैं. अर्ली या माइल्ड रेटिनोपैथी इसका पहला चरण है. दूसरे चरण में लक्षण आने शुरू हो जाते हैं. अंतिम चरण में नसें बननी शुरू हो जाती हैं.

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कैसे करें डाइग्नोज

सबसे पहले अस्पताल जाकर जांच करवाएं. क्लिनिकल एग्जामिनेशन करवाएं. फंडस फ्लोरेसिन एंजियोग्राफी के जरिए भी पता चल सकता हैं. इसके अलावा ओसीटी करवा सकते है. 

कैसे हो सकता है इलाज

सबसे पहला इलाज मरीज के हाथ में है. अपनी ब्लड शुगर को कंट्रोल करें. सेहत से जुड़ी अन्य समस्याएं हैं तो उन्हें भी कंट्रोल करें. सबसे पहला विकल्प लेजर एप्लिकेशन है. इंजेक्शन के जरिए दवाएं दी जाती हैं.

आपको बता दें कि अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल करने आप हमेशा के अंधपन से बच सकते हैं. जिनका बल्ड शुगर कंट्रोल अच्छा होता है, उनमें डायबिटिक रेटीनोपैथी होने की संभावना कम होता है. 15 से 20 साल पुराने डायबिटीज रोगीयों को डायबिटिक रेटीनोपैथी होने की संभावने 80 से 100 प्रतिशत है. हालांकि डायबिटीज डायबिटिक रेटीनोपैथी होने का इकलौता कारण नहीं है. यह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है और ब्लड शुगर, किडनी या हार्ट से जुड़ी समस्याएं भी भूमिका निभाती हैं.

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