Ott India News Logo
Recent Posts
Connect with:
Wednesday / October 5.
Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफतो क्या लुप्त होने की कगार पर है समुद्री कछुए ?

तो क्या लुप्त होने की कगार पर है समुद्री कछुए ?

sea turtles
Share Now

समुद्री कछुए (sea turtles) . दुनिया के सबसे प्राचीन जीवों में से एक. धरती के सबसे पुराने सरीसृपों में से एक है sea turtles.  समुद्री कछुए डायनासोर के वक्त से इस धरती पर है. और उसमे कुछ बदलाव नहीं हुआ है. समुद्री कछुए (sea turtles) की सात प्रजातियां है. सभी समुद्र में रहती हैं – लेदरबैक, लॉगरहेड, केम्प की रिडले, ग्रीन, ऑलिव रिडले और हॉक्सबिल – आर्कटिक और अंटार्कटिक को छोड़कर हर महासागर में पाई जाती हैं. सातवां, फ्लैटबैक, केवल ऑस्ट्रेलिया के आसपास के  समुद्र में रहता है.

लेधरबैक कछुआ समुद्र का सबसे बड़ा कछुआ है. जिसका वजन 2,000 पाउंड तक हो जाता है. यह एकमात्र ऐसा कछुआ जिसका बोन सेल मजबूत नहीं होता.  इसका carapace  लचीला होता है और लगभग रबड़ जैसा लगता है. अन्य समुद्री कछुओं के carapace  मोटी प्लेटों से बने होते हैं. जिन्हें इस हड्डियों के प्लेट्स को scutes कहा जाता है. यह कछुओं के दांत नहीं होते. इसके बजाय, उनके ऊपरी और निचले जबड़े में केराटिन से बना म्यान होते है. जो खोपड़ी पर झूठे दांतों की एक जोड़ी की तरह फिट होते हैं. केराटिन वही जिससे आपके नाखून बने होते हैं. 

sea turtles

leatherback turtle Image-WWF

समुद्री कछुए की प्रजातियां आकार में बहुत भिन्न होती हैं. सबसे छोटी, केम्प की रिडले, लगभग 70 सेमी लंबी और वजन में 40 किलोग्राम तक होता है. जबकि लेदरबैक 180 सेमी और 900 किलोग्राम के वजन तक पहुंच सकता है.  लेधरबैक कछुए GELATINIVORE होते है जो प्रमुख रूप से जैली फिश को खाते है. लोगरहैड कछुए के बच्चे ओमनीवोरस होते है यानी जो मिले वो खा लेते है. लेकिन पुख्त मांसाहारी होते है जो केकड़े,  whelks, और conchs को अपनी खुराक बनाते है.

क्या खाते है समुद्री कछुए

हॉक्सबिल्स कछुए sea sponges खाते है.  हॉक्सबिल्स को पक्षी नुमा मुंह ही यह खुराक ढूंढने में मदद करता है. ग्रीन सी टर्टल तृणाहारी होते है जो कोरल रीफ के पास उगने वाली घास और अल्गी खाते है. जब कि ग्रीन सी टर्टल के बच्चे मिश्राहारी होते है. फ्लेटबैक टर्टल सबकुछ खाते है समुद्र घास से लेकर जिंगे तक सबकुछ खाते है. केम्प रिलडे सिर्फ केकड़े खाते है. जब की ओलिव रिडले मिश्राहारी होते है.  जो जैलीफिश,sea cucumbers,मछली जैसे अनेक जीवों को खुराक में लेते है. 

समुद्री कछुओं का प्रजनन

समुद्री कछुओं का कोर्टशिप जब शुरु होता है. तब नर कछुए मादा की गरदन और फ्लिपर पर हलका सा काटते है. मादा नर से दूर नहीं भागती तो नर मादा की पीठ पर चढ़ जाता है. नर और मादा के रिप्रोडक्शन ओर्गन्स पूंछ के अंदर होते है. नर की बड़ी पूंछ होती है जब की मादा पूंछ छोटी होती है.  समुद्री कछुए अकेले रहते है जब मेटिग पीरियड शुरू होता है तब की मादा और नर को एक साथ देख सकते है. नर मादा की पीठ पर चढ़ जाता है. और आगे के दोनों फ्लिपर्स से मादा को टाईट पकड़ता है. और इसी स्थिति में मादा और नर सांस लेने उपर आते है. समुद्री कछुए का मेटिग मादाओं के लिए बेहद थका देना वाला होता है. क्योकि मादा को नर के साथ लेकर सतह पर सांस लेने के लिए आना पड़ता है.  

मेटिग में कई घंटे लग सकते हैं. इस मेटिग को रोकने के लिए बहुत से नर कछुए पहुंच जाते है. अन्य नर मेटिग में खलेल ड़ालकर खुद संभोग करने की कोशिश करते है. इसमे दूसरे प्रतिस्पर्धी कछुए नर कछुए को काटते है. जिससे नर कछुआ मादा को छोड़ दे. इस प्रक्रिया में मादा कछुए को डूबने का खतरा भी रहता है. मेटिग खत्म होते ही नर और मादा अलग हो जाते है. जिसके बाद मादा दूसरे नर के साथ मेटिग करती है. मादा कई नर के साथ मेटिग करती है. कई महिनों तक नक कछुओं का वीर्य एकठ्ठा होता है और तब जा के मादा के अंडे फर्टिलाईज होते है.

sea turtles

green sea turtle mating Image- Tracy Olive

 

यहाँ भी पढ़ें : जाने फ्लेंमिंगो के गुलाबी पंख का रहस्य

एक मादा समुद्री कछुआ एक गर्भकाल में कई अंडे दे सकती है. सभी अंडे विभिन्न नरो द्वारा फर्टिलाईज किए गए होते हैं. जो आनुवंशिक विविधता योगदान करते है. जमीन पर आने पर मादाएं बहुत कमजोर होती है. वे पानी से बाहर के जीवन के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित नहीं होती. और इसलिए बहुत धीमी गति से आगे बढ़ती हैं. जैसे ही वह अपने अंडे देना शुरू करती है, वह एक समाधि जैसी अवस्था में चली जाती है. एक बार समाप्त होने के बाद, वह अंडे के चेम्बर को रेत से ढक देती है. औसतन, एक अंडे के चेम्बर में 70 और 125 अंडे के बीच हो सकते है. वह फिर वापस समुद्र में चली जाती है.  

(sea turtles) समुद्री कछुए की जाति अंड़े के चेम्बर के तापमान पर निर्भर करती है. नेस्ट का तापमान 31 सेल्सियस हो तो ज्यादातर अंडों में से मादाएं निकलती है.  और नेस्ट का तापमान 28 सेल्सियस हो तो ज्यादातर नर अंडों में से बाहर निकलते है. छोटे बच्चे अंडे से निकल जाने के बाद सीधा पानी का रुख करते है. लेकिन इस बीच अनेक शिकारी पक्षी बच्चों को अपना निवाला बना लेते है. 100 में से एक ही बच्चा पुख्त हो सकता है. बाकी को कुछ पक्षी खा जाते है, कुछ को बड़ी मछलियां. इस तरह 100 में से एक बच्चा जिंदा रहता है.  

जब समुद्री कछुए (sea turtles) परिपक्व हो जाते हैं और प्रजनन के लिए तैयार होते हैं, तो वे अपने फिडिग ग्राउंड वाले समुद्र तट पर चले जाते हैं. जहां वे पैदा हुए थे. मादाएं हर 2-3 साल में वापस आती हैं. जबकि नर कछुए सालाना प्रवास करते हैं. (sea turtles) समुद्री कछुए लगभग 20-25 वर्ष की आयु में परिपक्वता तक पहुंचते हैं समुद्री कछुए भोजन और प्रजनन क्षेत्रों के बीच अविश्वसनीय रूप से लंबे समय तक प्रवास करते हैं. कछुए हर तरह से औसतन 3,700 मील की यात्रा करते है. समुद्री कछुए पृथ्वी की मेग्नेटिक फिल्ड का उपयोग करके प्रवास करते है. सी टर्टल्स में गिओमेग्नेटिक ऐबेलिटी होती है. गिओमेग्नेटिक ऐबेलिटी कछुए को GPS की तरह मदद करती है.

sea turtles

Olive Ridley Image-WWF

समुद्री कछुए के दिमाग में मेग्नेटाईट के पार्टिकल होते है. एक तरह से मेग्नेटिक मिनरल्स होते है. नेविगेट करने में मेग्नेटाईट मदद करते है. जिससे (sea turtles) समुद्री कछुओं को पृथ्वी के पोल का पता लगता है. मेग्नेटाईट एक दिशासूचक यंत्र की तरह मदद करता है. (sea turtles) समुद्री कछुए के बच्चे इसी मेग्नेटाइज की मदद से जहां जन्मे हो वहां का मेप दिमाग में रखते है. और जब उनकी अंडे देने के उम्र होती है तब इसी मेग्नेटिक फिल्ड का उपयोग करते है. और जन्म हुआ हो वही जगह पहुंच पर जाते है. 

सभी समुद्री कछुए की प्रजातियों पर भयंकर खतरा मंडरा रहा है.  कुछ को अतिसंकट ग्रस्त श्रेणी में रखा गया है तो कुछ तो संकटग्रस्त श्रेणी में. बहुत शिकार से यह जीव संकट में है. तो कई जगह पर मछलियों के नेट में फस जाने की वजह से कछुओं पर मौत मंडरा रहा है.कछुए के अंडों का वेपार, कछुए के प्रोडक्ट भी कछुओं की संख्या घटा रहे है.  कुछ कछुए पानी में प्लास्टिक या दूसरी चीजे खाकर मर रहे है. लैधरबैक जैसे जैलीफिश खाने वाले कछुए प्लास्टिक को जैलीफिश समझकर खा लेते है. जो पचा नहीं पाते है और उनकी मौत हो जाती है. हर साल हमारे महासागरों में 8 मिलियन टन प्लास्टिक फेंके जाने से यह अद्भुत जीव खतरे में हैं. 

यहाँ भी पढ़ें : तेंदुए क्यो खाते है पेड़ पर खाना?

क्लायमेन्ट चेंज के कारण तापमान बढ रहा है. जिससे कछुए के अंडों पर सीधा असर हो रहा है. डायनासोर के समय से कछुओं को कुछ नहीं हुआ लेकिन अब इंसान इस अदभुत जीव को मार रहा है. खत्म कर रहा है. इस जीव को बचाने के लिए समग्र विश्व 16 जून World Sea Turtle Day मनाया जाता है. सरकारी संस्थाए एवं अनेक एनजीओ समुद्री कछुओं को बचाने का काम कर रहे है. तो चलिए इस  World Sea Turtle Day पर इस कछुए को बचाने के लिए प्रयास करे और प्लास्टिक को समुद्र में न फेंके.

अधिक रोचक जानकारी के लिए डाउनलोड करें:- OTT INDIA App

No comments

leave a comment