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मिलिए सबसे कम उम्र के आईएएस ऑफिसर से!

Ansar Sheikh, youngest IAS of India
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हाथों की लकीरों पर यकीन न कर ये ग़ालिबक्योंकि नसीब उनका भी होता है जिनके हाथ नहीं होते’। – अंसार शेख

मेहनत इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दे।  यह कहावत आपने कई बार सुनी होगी, लेकिन इस कहावत को यतार्थ होते बहुत ही कम सुना होगा. आज हम आपको ऐसे ही एक शख्स की कहानी बताएंगे. जिसने बहुत ही कम उम्र में देश की सबसे कठीन परीक्षाओं में से एक यूपीएसी को क्रेक कर लिया था. यह कहानी देश में सबसे कम उम्र में आएएस बनने वाले अंसार शेख की. जिन्हें अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए न तो गरीबी रोक पाई, न ही उम्र.

बचपन से ही रहे बहुमुखी प्रतिभा के धनी

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके के शेलगांव में 1 जून 1995 को जन्में अंसार शेख बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी तो थे, लेकिन गरीबी भी इतनी थी हमेशा उन्हें उंचे सपने देखने से रोकती थी. कहते हैं न अगर किसी चीज को आप पूरी शिद्दत से चाहो, तो पूरी कायनात तुम्हें उससे मिलाने में जुट जाती है.’ अंसार शेख के पिता एक ऑटो चलाते थे. उन्हे शराब की भी आदत थी. अंसार के परिवार में कोई भी ग्रेज्युएट नहीं है, लेकिन अंसार पढ़ाई में बचपन से ही बहुत तेज थे.

पढ़ाई छोड़ने की आ चुकी थी नौबत

परिवार में पढ़ाई का माहौल न होने के चलते एक बार नौबत यहां तक आ गई थी कि उनके पिता ने चौथी कक्षा के बाद पढ़ाई बंद कराने का फैसला लिया था. इस बात की खबर जब अंसार के शिक्षक पुरुषोत्तम पडुलकर के लगी, तो उन्होंने अंसार के पिता को समझाया कि आपका बेटा बहुत होनहार है, वह आगे जाकर बहुत बड़ा आदमी बनेगा. अंसार कहते हैं कि कम पढ़े लिखे लोगों की एक खासियत होती है कि वह पढ़े लिखे लोगों की बात जल्दी मान लेते हैं. बस यही अंसार के पिता के साथ हुआ. उन्हें शिक्षक की बातें सुनकर लगा कि अब तो अंसार को पढ़ा-लिखा कर बढ़ा आदमी बनाकर ही दम लेगें. अंसार के घर की माली हालत बहुत खराब थी. अंसार कहते हैं कि कभी कभी हालात ऐसे हो जाते थे कि रात का खाना तक छोड़ना पड़ता था. अंसार की मां अजामत शेख मजदूरी करके अपने बेटे की पढ़ाई के लिए पैसे भेजती थी.

Ansar Sheikh with his parents

अंसार शेख अपनी माता अजामत शेख और पिता अहमद शेख के साथ

छोटे भाई ने बड़े होने का एहसास दिलाया

आपने यह बात कई बार सुनी होगी कि एक बड़ा भाई अपने छोटे भाई को पढ़ाने के लिए जान लगा देता है. अपनी सारी कमाई उस पर लुटा देता है. लेकिन कभी ऐसा सुना है कि कोई छोटा भाई अपने बड़े भाई को पढ़ाने के लिए महीने की सारी कमाई उसे भेज देता है. अंसार की जिंदगी में कुछ ऐसा ही है. अंसार हमेशा कहते हैं कि उनका एक छोटा भाई है, जो उनसे बड़ा है. ऐसा अंसार इसलिए कहते हैं कि उनके छोटे भाई अनीस शेख ने छठवीं कक्षा से ही पढ़ाई छोड़कर अपने मामा के यहां काम करना शुरू कर दिया था. जिससे अनीस को हर महीने 6 हजार रूपए मिलते थे, जिनमें से एक भी पैसा खर्च किए बगैर वह सारा पैसा अंसार के पास पहुंचा देते थे. अंसार के जीवन में एक समय ऐसा भी आया था, जब अंसार को कम्प्युटर की पढ़ाई के लिए फीस देनी थी, लेकिन पैसे नहीं थे. तभी उन्होंने एक रेस्टोरेंट में तीन हजार रूपए महीने की नौकरी कर ली. जिसमें उन्हें कुए से पानी लाना, झाड़ू-पोछा करना जैसे काम करना पड़ता था.

पिता से मांगी रिश्वत, तो अफसर बनने का लिया फैसला

अंसार जब छोटे थे, तब घरकूल योजना के तहत 30 हजार रूपए की राशि मिली थी. जब इस राशि का चैक लेने अंसार के पिता अधिकारी के पास गए, तो उन्होंने कुल राशि का तीन प्रतिशत रिश्वत के रूप में मांगा था. तब अंसार ने यह सोंच लिया था कि वह बड़े असफर बनेंगे, लेकिन बड़े अफसर कैसे बनते हैं इस बात का ज्ञान नहीं था. तभी अंसार के एक शिक्षक ने एमपीएससी यानी महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा पास कर ली और एक अधिकारी बन गए. अंसार के जब इस बात की खबर लगी तो उनसे मुलाकात कर एमपीएससी के बारे में जानकारी ली. तब अंसार ने सोचा की मैं भी एमपीएससी की पढ़ाई करूंगा. इसके बाद जब वह 10 की परीक्षा पास करके जूनियर कॉलेज में पढ़ाई के लिए गए, तो उनके एक शिक्षक से अंसार को यूपीएससी के बारे में पता चला. जिसके बाद अंसार ने यह तय कर लिया कि अब तो आइएएस ही बनना है और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिनरात मेहनत करनी शुरू कर दी और देश के सबसे कम उम्र को आईएएस बन गए. अंसार ने मराठी मीडियम से 91% अंकों के साथ 12 वी पास की.

Ansar Sheikh

ऑटो चालक का बेटा भी देख सकता है सपने

आईएएस अंसार बनने के बाद एक सामाजिक कार्यक्रम में किस्सा शेयर करते हुए बताते हैं कि एक बार एक ऑटो चालक अंकल ने उनसे कहा कि अंसार मैं भविष्य देख सकता हूं. हालांकि अंसार जैसा शख्स जो सिर्फ मेहनत पर भरोषा करता हो, वो भला भविष्य जैसी बातों पर कैसे यकीन करता है. फिर भी उनकी इज्जत रखने के लिए अंसार ने अपना हाथ दिखाया. तो हाथ देखकर उन्होंने अंसार से कहा कि आप आएएस नहीं बन सकते, आप क्लास बी का कोई अफसर जरूर बन सकते हो. अंसार गालिब की दो लाइनें हमेशा दोहराते हैं कि हाथों की लकीरों पर यकीन न कर ये ग़ालिबक्योंकि नसीब उनका भी होता है जिनके हाथ नहीं होते. इस बात तो आज के हर युवा को समझना चाहिए कि हमे अपनी मेहनत पर भरोषा करना चाहिए, न कि हाथ दिखाने जैसे अंधविश्वास में. हमें अपना भविष्य अपनी मेहनत से बनाना पड़ता है.

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