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Tuesday / November 29.
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कोरोना को हराना है, खड़गदा गांव को जितना है!

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राजस्थान के खड़गदा गाँव के बुद्धिजीवी नौ जवानों ने कोरोना के खिलाफ जंग छेड़ दी है, गाँव में बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए बुद्धिजीवी व्यक्ति एक जुट होकर लोगों की सहायता कर रहे हैं। देश-विदेश में रहते गाँव के सभी बड़े धनाढ्य परिवार के लोग किसी ना किसी तरह से सहायता कर रहे हैं। कोई दवाओं के फ्री में भेज रहे हैं, तो कई लोग ट्रस्ट के द्वारा भोजन उपलब्ध करवा रहें हैं, इस तरह से खड़गदा गाँव (Khadgada Village)  को कोरोना से मुक्त करने के लिए हर तरह की सहायता और प्रयास किए जा रहे हैं। 

खड़गदा गाँव में आशा और सकारात्मकता की पहल करती युवा शक्ति

– श्री दत्त प्रसाद दवे
– डॉ जितेश भट्ट
– श्री मनीष भट्ट
– श्री अमित दवे
– श्री विरंचि दिक्षित
– श्री परेश भट्ट
– श्री अनिल पुरोहित

खड़गदा के लोगों का हौसला बढ़ाने बुद्धिजीवी युवाओं की ये पहल रोज़ सकारात्मक विचारों का सर्जन कर रहे हैं। जिनमें  श्री विरंची दिक्षित, श्री अमित दवे, डॉक्टर जीतेश भट्ट, श्री मनीष भट्ट(Jashoda homeo pharmacy), खडगदा गांव के उपसरपंच श्री अनिल पुरोहितजी, और श्री दत्त प्रसाद दवे जी, श्री परेश भट्ट,   ये सभी लोग मिलकर गाँव की सेवा में प्रतिदिन काम कर रहे हैं। 

“यहाँ तक कि कोरोना के संक्रमण को बढ़ता देख खड़गदा गाँव के निवासियों ने स्वेक्षा अनुसार एक सप्ताह का लाकडाउन लगा लिया है”। 

श्री अमित दवे 

कोरोना महामारी के इस मूक प्रहार ने हर जगह अपना प्रसार कर लिया है। एक समय आप और हम केवल इसके प्रकोप की खबरे सुनते अथवा देखते थे। किन्तु वर्तमान परिस्थितियों में यह क्रूर दैत्य अपने पडौस-घर-परिवार तक पसर गया है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इस रक्तबीज रूपी दानव के प्रकोप से हम दूर नहीं हैं । तथापि इस काल की मंशाओं को निराधार करने हेतु हमें अन्तर्मन से स्थिर होकर घरों में रूकना सुनिश्चित् करना होगा। यदि हम और हमारे देशवासी एकवर्ष पूर्व इन दिनों संयम एवं सहयोग पूर्वक महिनाभर समर्पित भाव से निर्देशानुसार व्यवहार सुनिश्चित् करते तो आज के रूप में पूर्व से भी विकराल आवृत्ति से सामना नहीं करना पड़ता।

महामारी के इस कठिन दौर में हमें डरना नहीं है, हमें इस संसार की रीति के परे अब कुछ सरल,सहज़, सहयोगी एवं सात्विक होना है। संयम से स्वयं व संपर्क में आनेवालों को नियोजित करना है। दुर्गा सप्तशती की..गर्ज गर्ज क्षणं मूढ़ः यावद्मधुं न पिबाम्यहम्  नामक सूक्ति को आज की परिस्थितियों में यथार्थ करते हुए इस कोरोना दानव के विरूद्ध सामर्थ्य व आत्मविश्वास का रूककर संचय करना है, निश्चित् ही हम ऐसा कर भी रहे हैं। हम यदि योजनाबद्ध तरीके से रूककर स्वयं के साथ अपनों को संरक्षित करते हुए सामर्थ्य को संग्रहित कर रहे हैं तो निश्चय मानो हम अभी रूके नहीं है, झुके नहीं हैं, बस अभी तो योजना पर कार्य कर रहे हैं…। हमें अपनी योजनाओं को सार्थक करने के लिए रूकना ही होगा…..हर अपने को रोकना भी होगा…. आज का अवरोधन ही कल का जीवन है…इसे स्वीकार करना ही होगा…! आप और हम एक बार बहक चुके हैं..इस महामारी के परिणामों को देख…अब अधिक सतर्क रहना है। लापरवाही को जीवन में अपने एवं अपनों के लिए कतई अवकाश नहीं देना है।

   श्री अमित दवे 

अब हमको…रूकना ही होगा…

हमें अपनों के लिए रूकना होगा..!

हमें अपने लिए रूकना होगा..!

हमें सपनों को सच करने के लिए रूकना होगा..!

भारत को भारत बनाए रखने के लिए फिर से ठहरना होगा..!

साँसों के सामर्थ्य को संचित करना होगा…!

हो रहे नुकसानों में भी जीवनराग तलाशना होगा..!

सुरक्षित आश्रय में रहकर कल की गति को.. नियोजित करना  होगा..!

टूट रहे अपनों के सपनों का विश्वास पुनः लौटाना होगा..!

दूर से ही सही मगर जीवन में शब्दों से उल्लास भरना होगा..!

कोरे आँकड़ों में बदलता जीवन फिर से जीवन करना होगा..!

कुछ समय और सुरक्षित, संयमित, नियमित रहना होगा..!

रूककर ही इस अदृश्य दानव को हराना होगा.. 

संयमित होकर ही इस दानव का समूलोन्मूलन करना और कराना होगा..!

आओ! दूर से ही सही मगर मिलकर हमको रूकना ही होगा….!

खड़गदा गांव के भट्ट परिवार दो केभाइयों ने मिलकर 1000 लोगों तक पहुंचाई दवाएं

श्री मनीष भट्ट (Jashoda homeo Pharmacy)

खड़गदा गांव के दो भाईयों ने मिलकर एक बेहतरीन कार्य किया है, 1000 लोगो तक पहुंचे उतनी दवाईयां अपने गांव भेजी है। डॉ. जितेश भट्ट और श्री मनीष भट्ट अहमदाबाद के निवासी हैं, भट्ट परिवार के द्वारा (Jashoda homeo Pharmacy) से दवाएं भिजवाई जा रही हैं। रोगप्रतिरोधक क्षमता बढें एवं कोरोना वाईरस से बढ़ रही बीमारियों से लडें ऐसी होमियोपैथी दवाइय़ों का काम्बीनेशन भेजा गया है। ये कार्य डा. जीतेश भट्ट एव श्री मनीश भट्ट द्वारा किया गया और श्री परेश भट्ट ने गांव तक पहुंचाने का कार्य किया। पूरा गांव मिल जुलकर काम कर रहा है। कोरोनो को हराना है खड़गदा को जीताना है। 

इस कोरोना महामारी के समय में हम एक बार पुन: इम्यूनिटी बूस्टर होमियोपैथिक मेडिसिन भेज दी गई है। श्री मनीष भट्टजी ने बताया कि, यह एक प्रभावी मेडिसिन है जो गांव पहुंचा दी गई है। परेश भट्ट द्वारा संपर्क किया जाएगा। और दवा के डिस्ट्रब्यूशन में सभी का सहयोग लिया जाएगा।

दवा को लेने के तीन तरीके हैं- 

डॉ. जितेश भट्ट

  • 4 गोली एक ग्लास पानी में मिलाकर अच्छे से पानी को हिलाकर उस पानी को पी लेना है। 
  • एक ग्लास से आराम से चार लोग मिश्रित दवाई का सेवन कर सकते हैं । 
  • दवाई का सेवन सिर्फ सुबह ही लेना है।
  • यदि कोई माइल्ड लक्षण से संक्रमित है  तो यह दवाई दिन में चार बार लेनी है।
  • किसी भी तरह की आशंका के निवारण को फोन पर पूछा जा सकता है। 

आप सभी के कुशल एवम उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना के साथ डॉक्टर जीतेश भट्ट, मनीष भट्ट और समस्त नाथूराम भट्ट परिवार, कोरोना से जूझ रहे लोगों की मदद कर रहे हैं। 

खड़गदागांव के उपसरपंच श्री अनिल जी पुरोहित

गांव के उपसरपंच श्री अनिल जी पुरोहित ने पुरे गांव में सोडियम हाइपो क्लोराईड का छिडकाव ट्रेक्टर के फव्वारें से करने की व्यवस्था की है ।

 “आशा है, तो जीवन है ” दत्त प्रसाद जी दवे

श्री दत्त प्रसाद जी दवे

एक राजा ने दो लोगों को मौत की सजा सुनाई l उसमें से एक यह जानता था कि राजा को अपने घोड़े से बहुत ज्यादा प्यार है। उसने राजा से कहा कि यदि मेरी जान बख्श दी जाए तो मैं एक साल में उसके घोड़े को उड़ना सीखा दूँगा l यह सुनकर राजा खुश हो गया कि वह दुनिया के इकलौते उड़ने वाले घोड़े की सवारी कर सकता है। दूसरे कैदी ने अपने मित्र की ओर अविश्वास की नजर से देखा और बोला, तुम जानते हो कि कोई भी घोड़ा उड़ नहीं सकता ! तुमने इस तरह पागलपन की बात सोची भी कैसे ? तुम तो अपनी मौत को एक साल के लिए टाल रहे हो l पहला कैदी बोला, ऐसी बात नहीं है। मैंने दरअसल खुद को स्वतंत्रता के चार मौके दिए हैं। पहली बात राजा एक साल के भीतर मर सकता है ! दूसरी बात मैं मर सकता हूं ! तीसरी बात घोड़ा मर सकता है ! और चौथी बात। हो सकता है, मैं घोड़े को उड़ना सीखा दूं !!

कहानी की सीख

बुरी से बुरी परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए। रिकवरी रेट बढ़ रहा हैं, पॉज़िटिवीटी रेट घट रहा हैं, बिस्तर बढ़ रहे हैं, आक़्सिजन बढ़ रही है, इंजेक्शन का बड़ा उत्पादन शुरू हो गया है । वैक्सीन आ गई है !! रेल एक्सप्रेस, वायुयान दौड़ रहे है, आयुर्वेद और योग शक्ति दे रहा हैं,धेर्य रखें हम जीत रहें हैं। आत्मविश्वास बनाए रखना है और सकारात्मक रहना है। सब तरफ से कुछ अच्छा होने वाला है। 

श्री विरंचि दिक्षित द्वारा लिखी पंक्तियाँ बहुत सी सीख दे रही हैं। खडगदा गांव के प्रति प्रेम इनकी द्वारा लिखी पंक्तियों में झलक रहा है। 

श्री विरंचि दिक्षित

खडगदा शीतल चाँद है, कोई टूटता तारा नहीं है,
खडगदा खामोश है बस, खडगदा हारा नहीं है…!!*
बहुत शान्त हैं गलियां अपने गांव की,
चहल कदमी भी कम है भीड़ भरे रहे बाज़ार में,
हां ये सच है –
खडगदा खामोश है, मगर खडगदा हारा नहीं है….!!*
सच है कि आज रथोत्सव का मेला नहीं है ,
होली चौक का आलम भी बहुत गमगीन है,*
खडगदा ये कर रहा है अपनी हिफाजत के लिये,
खडगदा आज चुप है, कल ये फिर तराने गायेगा..!!
खडगदा आज खामोश है,
मगर कल ये फिर मुस्कुरायेगा..
आओ…………..सब मिलकर प्रयास करे…

खड़गदा गांव के लोगों द्वारा नेक कार्य की मुहिम सफल बनेगी, और  जल्द ही गाँव वासियों को कोरोना से मुक्ति मिलेगी। OTT INDIA इन सभी सेवा भावियों को सलाम करता है। 

यहाँ पढ़ें: गढ़ी परिवार व खोड़निया परिवार की तरफ़ से निःशुल्क भोजन: सागवाड़ा

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Latest comments

  • सुंदर कार्य
    सुंदर कवरेज़
    हार्दिक आभार
    💐💐🙏

  • साधुवाद
    खडगदा के सभी सच्चे कर्मविरो को सलाम,
    सराहनीय एवं उत्साहवर्धक कवरेज हेतु
    OTT इंडिया को भी आभार !!!

    सलाम खडगदा

  • Ott india app dwara covid mhamari ke sandarbh me utsahvardhan kary nishchit hi sarahniy he .covid jakhmo me marhm bhrne ka karya ott india app sdev krta rhe yahi kamna.thanks to the whole fmily

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